05 Best Akbar Birbal Stories in Hindi 2021 | 05 लोकप्रिय अकबर बीरबल कहानियाँ हिंदी में

05 Best Akbar Birbal Stories in Hindi 2021

05 Best Akbar Birbal Stories in Hindi 2020
05 best akbar birbal stories in hindi

इस Blog में आपको 05 best akbar birbal stories hindi में पढ़ने को मिलेंगी जो आपने अपने दादा दादी से सुनी होंगी। ये hindi stories बहुत ही ज्ञानवर्धक है। अकबर और बीरबल के किस्से तो आपने अपने बचपन मे बहुत सुने होंगे। हमने भी इस ब्लॉग में 05 best akbar birbal stories hindi में लिखा है जिसको पढ़कर आपको बहुत ही ज्यादा ज्ञान मिलेगा और आपका मनोरंजन भी होगा। इसमे कुछ 05 best Akbar Birbal Stories In Hindi 2021 दी गयी है। जिसमे आपको नयापन अनुभव होगा। यदि आप पुरानी कहानियाँ पढ़कर बोर हो गए है तो यहाँ पर हम आपको 05 best akbar birbal stories hindi दे रहे है जिसको पढ़कर आपको बहुत ही ज्यादा मज़ा आने वाला है।


बीरबल की नियुक्ति


बहुत समय पहले की बात है बादशाह अकबर ने अपने गाँव मे दरबार लगाया और घोषणा की कि जो भी व्यक्ति उनकी जीवंत तस्वीर बनायेगा उसको एक हज़ार सोने की मुद्राये दी जाएंगी। उसी गाँव मे एक युवा ब्राह्मण किसान महेशदास भी रहता था। उसने भी अकबर की ये घोषणा सुनी।

निश्चित दिन को सभी कलाकार अपने हाथ मे अकबर की ढकी हुई तस्वीर लेकर आये। सब लोग यह जानने को उत्सुक थे कि आखिर एक हज़ार सोने की मुद्राये किसे मिलती है । अकबर का दरबार लोगों से पूरी तरह भरा था। सबकी नजरें बस यही देखना चाहती थी कि बादशाह को किसकी बनाई हुई तस्वीर पसन्द आएगी।

अकबर एक ऊँचे स्थान पर बैठे हुए थे और एक-एक करके सारे कलाकारों की बनाई हुई तस्वीर देख रहे थे और उस तस्वीर पर अपना विचार दे रहे थे। वे एक- एक करके सारी तस्वीरों को मना करते गए और बोले ये तस्वीरें वैसी नही है जैसा मैं अब हूँ।

सारे कलाकारों ने एक-एक करके अकबर को उनकी तस्वीर दिखाई पर बादशाह को एक भी तस्वीर पसन्द न आई। अब सिर्फ महेशदास ही बचा था जो बाद में बीरबल नाम से प्रख्यात हुआ। महेशदास की बारी आते-आते बादशाह अकबर पूरी तरीके से परेशान हो चुके थे। उन्होंने महेशदास को देखा और बोला क्या तुम भी इन लोगो की तरह मेरी तस्वीर लेकर आये हो। महेशदास ने बड़ी शांति के साथ बादशाह अकबर के करीब गया और बड़ी विनम्रता से उनसे बोला मेरे बादशाह, अपने आप को इसमें देखिये और सन्तुष्ट कीजिये।

और सबसे बड़ी बात तो यह थी कि महेशदास ने बादशाह की कोई तस्वीर नही बनाई थी बल्कि उसके पास से एक आईना निकला जो कि अच्छी तरीके से सजाया हुआ था।

यह देखकर दरबार मे उपस्थित सभी लोगो ने एक साथ बोला - यही है बादशाह की सबसे उत्तम तस्वीर। बादशाह ने भी माना कि ये बिल्कुल वैसी ही है जैसा मैं अब हूँ।

अकबर ने महेशदास का सम्मान किया और उन्हें एक हज़ार सोने के सिक्के भी दिए और साथ मे ही बादशाह ने महेशदास को एक राजकीय मोहरे अंगूठी दी और अपनी राजधानी फतेहपुर सीकरी में आने का आमंत्रण दिया। यही महेशदास आगे चलकर अकबर के सबसे विश्वासपात्र बीरबल के बीरबल के नाम से मशहूर हुए।

शिक्षा-
अपने ग्राहक को वो दे जो वो चाहता हो और जिससे उसकी आवश्यकता पूर्ण हो। अकबर किसी भी कलाकार से अपनी तस्वीर नही चाहता था बल्कि वह वास्तविकता देखना चाहते थे जो कि एक आईना ही दिखा सकता है।



बीरबल और तीन गुड़िया


एक बार की बात है बादशाह अकबर के दरबार मे एक कलाकार तीन गुड़िया लेकर आया। ये तीनो गुड़िया बिल्कुल एक जैसी थी और साथ मे बहुत ही ज्यादा सुंदर भी थी। उन तीनों गुड़िया में अंतर बताना बहुत ही ज्यादा मुश्किल था। बादशाह अकबर को वो तीनो गुड़िया बहुत ही ज्यादा अच्छी लगी। उसने कलाकार से कहा कि हमे ये तीनो गुड़िया पसन्द आ गयी है, तुम ये तीनो गुड़िया हमे दे दो और हम तुमको इन तीनो गुड़ियों की अच्छी कीमत दूँगा।

कलाकर ने कहा - जहाँपनाह मैं एक कलाकार हूँ, मैं अपने इन तीनो गुड़ियों को बेच नही सकता हूँ पर मैं आपको ये तीनो गुड़िया भेंट में दे सकता हूँ अगर आपके दरबार मे कोई बात दे कि इनमें से अच्छी कौन सी है। यह एक बहुत ही कठिन पहेली थी क्योंकि तीनो गुड़िया समान सी थी। अकबर ने तीनों गुड़ियों को बारिकी से देखा परन्तु वे तीनों इतनी समान थी कि बादशाह यह बताने में विफल हो गए कि इनमें से अच्छी कौन सी है। बादशाह ने बारी-बारी से सभी मंत्रियों को गुड़िया दिखाई परन्तु कोई भी उन तीनों गुड़िया में से अच्छी गुड़िया को पहचान न पाया।

बादशाह अकबर ने बीरबल को बुलाकर कहा - बीरबल तुम क्यों नही कोशिश करते, मुझे विश्वास है कि तुम यह बताने में जरूर सफल हो जाओगे की इनमे से अच्छी गुड़िया कौन सी है। बीरबल ने बादशाह अकबर के सामने सम्मान में सिर झुकाया और गुड़िया के पास गया। उसने तीनों गुड़ियों को बारी-बारी से उठाया और बहुत ही बारीकी से देखा। सभी लोग बीरबल को बहुत ही आश्चर्य से देख रहे थे। बीरबल ने एक गुड़िया कर कान में फूका तो हवा दूसरे कान से बाहर निकल आयी। बीरबल ने दूसरी गुड़िया के कान में फूका तो इस बार हवा मुह की तरफ़ से बाहर निकली। बीरबल ने आखिरी गुड़िया उठायी और उसके कान में फूँक मारी पर इस गुड़िया में से हल्की सी भी हवा बाहर न निकली।

बीरबल ने बादशाह अकबर से कहा- जहाँपनाह ये तीसरी गुड़िया इनमे से सबसे अच्छी है। बादशाह अकबर तथा वहाँ उपस्थित सभी लोग आश्चर्यचकित हो गए। बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा तुम यह कैसे जान गए कि कौन सी गुड़िया सबसे अच्छी है।

मेरे मालिक यह तीनों गुड़िया तीन अलग व्यक्ति की तरह है। जब मैंने पहली गुड़िया के कान में फूंक मारी तो दूसरे कान से हवा बाहर आ गयी। कुछ लोग भी इसी तरह होते है यदि आप ऐसे लोगों को कोई रहस्य बताएँगे तो वे अगले ही पल में उसे भूल जाएँगे।

वही जब मैंने दूसरी गुड़िया में फूंक मारी तो हवा उसके मुँह से बाहर निकली। कुछ लोग भी इस गुड़िया की तरह होते है यदि आप ऐसे लोगो को अपना कोई रहस्य बताएँगे तो वे अगले ही पल उसे किसी दूसरे व्यक्ति से बता देंगे। ऐसे लोग बहुत ही खतरनाक होते है।

जबकि ये तीसरी गुड़िया जिसे मैंने सबसे अच्छी बताया है, जब मैंने इसमे फूंक मारी तो हवा कहीं से भी बाहर न निकली। जो व्यक्ति इस गुड़िया की तरह होते है वही सबसे उत्तम इंसान होते है क्योंकि ये आपके रहस्य को किसी दूसरे के साथ साझा नही करते है। इस तरह के व्यक्ति अच्छे होते है जो रहस्य को छुपाकर रखते है। आप ऐसे लोगो के साथ अपने रहस्य को साझा कर सकते है।

कलाकार ने कहा- अभी तक मैन सिर्फ बीरबल के बुद्धिमानी के किस्से ही सुने थे परंतु आज देख भी लिया और मैं बहुत ही ज्यादा प्रभावित भी हुआ हूँ। जहाँपनाह ये तीनो गुड़िया आपकी हुई।

बादशाह अकबर ने कहा उसे बीरबल पर बहुत गर्व है।



सड़क के मोड़


एक बार की बात है, फारस के राजा ने बादशाह अक़बर को एक अजीब सा पत्र भेजा। इस पत्र में उन्होंने बादशाह अकबर से पूछा था- बताइये आपके राज्य में हर सड़क में कितने मोड़ है? यह एक काफी विचित्र सवाल था क्योंकि बादशाह अकबर का राज्य बहुत ही बड़ा था और अपने मंत्रियों को भेजकर सड़क के मोड़ को गिन पाना बिल्कुल ही असम्भव था।

फ़िर भी बादशाह अकबर ने अपने प्रधानमंत्री टोडरमल को बुलाया और राज्य के हर सड़क में कितनी मोड़ है ये गिनकर आने को कहा। बदले में टोडरमल ने अपने आदमियों को राज्य के मोड़ो को गिनकर आने को कहा।

अगले दिन बीरबल ने देखा बादशाह अकबर कुछ परेशान से लग रहे है। वह बादशाह के निकट गए और उनसे कहा- जहाँपनाह, आप कुछ परेशान से लग रहे है। कोई बात है क्या?

अकबर ने कहा- हाँ बीरबल, मैं टोडरमल का इतंज़ार कर रहा हूँ। उसे मैंने अपने राज्य के सड़कों के मोड़ो की गिनती करके आने को कहा था। बादशाह अकबर ने बीरबल को फारस के राजा के पत्र के बारे में बताया।

बादशाह अकबर की पूरी बात सुनते ही बीरबल ज़ोर-ज़ोर से हसने लगे। बीरबल को हँसता देख बादशाह अकबर ने उससे पूछा- बीरबल फारस के राजा के पत्र के बारे में सुनकर तुम इतनी जोर-जोर से हँस क्यों रहे हो। बीरबल ने बोला जहाँपनाह मैं आपके राज्य का ही नही बल्कि पूरे विश्व के सड़को के मोड़ बता सकता हूँ।

बादशाह अकबर की आँखे खुली की खुली रह गयी। उन्होंने बीरबल से बोला- मुझे उम्मीद है कि तुम मज़ाक नही कर रहे होंगे। मैन अपने बहुत से आदमियों को राज्य के सड़क के मोड़ो को गिनने के लिए भेजा है और तुम कह रहे हो कि तुम पहले से जानते हो कि राज्य की सड़कों में कितनी मोड़े है।

बीरबल ने कहा- जहाँपनाह मैं बिल्कुल भी मज़ाक नही कर रहा हूँ, मुझे वास्तव में पता है कि राज्य की सड़कों में कुल कितनी मोड़े है। यह सुनते ही बादशाह अकबर बोल उठे- तो फिर बताओ बीरबल अपने राज्य में कुल कितनी मोड़े है? बीरबल बोले- जहाँपनाह दुनियाँ की सड़कों में केवल दो ही मोड़े होती है। एक दायीं ओर और दूसरी बायीं ओर। यह सुनते ही बादशाह अकबर ज़ोर से हँस पड़े। यह तो बहुत ही आसान सा सवाल था और मैन इसके बारे में सोचा ही नही। बादशाह अकबर ने बीरबल को अच्छा सा उपहार इनाम के रूप में दिया और शाही कवि को फारस के राजा के पास इसका जवाब भेजने को कहा।



कंजूस व्यापारी और गरीब चित्रकार


अकबर के राज्य में हरिनाथ नाम का एक बहुत ही प्रतिभाशाली चित्रकार रहता था। वह लोगों का चित्र बनाकर अपना जीवन निर्वाहन करता था। क्योंकि वह चित्रकारी में बहुत ही अच्छा था इसीलिए वह पूरे राज्य में प्रसिद्ध भी था। दूर दराज से लोग उससे अपना चित्र बनवाने आते थे। बहुत से अमीर लोग उससे अपना चित्र बनाने के लिए आग्रह करते थे। हरिनाथ एक चित्र को बनाने में बहुत समय लेता था क्योंकि वह पहले बारीक से बारीक जानकारी इकट्ठा करता था इसलिए उसके सारे चित्र जीवित प्रतीत होते थे। परन्तु वह बहुत ज्यादा पैसे नही कमा पाता था और कमाया गया ज्यादातर पैसा चित्र बनाने के लिए कच्चे माल खरीदने में खर्च हो जाता था।

एक बार एक अमीर व्यापारी ने हरिनाथ को एक चित्र बनाने के लिए आमंत्रित किया। हरिनाथ ने सोचा कि यहाँ उसे उसके चित्र की अच्छी कीमत मिल जाएगी। यही सोचकर वह उस व्यापारी का चित्र बनाने को राजी हो गया। वह कुछ दिनों के लिए वहाँ रुका और व्यापारी का चित्र बनाने के लिए कड़ी मेहनत शुरू कर दी।

किन्तु व्यापारी एक कंजूस आदमी था। जब कुछ दिनों की कड़ी मेहनत के बाद तस्वीर तैयार हो गयी तो हरिनाथ चित्र लेकर व्यापारी के पास गया।

व्यापारी ने मन मे सोचा- ये तस्वीर तो वास्तव में ही बहुत अच्छी है पर यदि मैंने अभी इसकी तारीफ की तो मुझे इस कलाकार को सौ सोने के सिक्के देने होंगे। इसीलिए व्यापारी ने उस तस्वीर में कमियाँ निकालनी शुरू कर दी। उसने कहा- तुमने इस तस्वीर में मेरे बालों को सफ़ेद कर दिया है, मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कि मैं बुड्ढा हो गया हूँ, मैं इस तस्वीर का भुगतान नही करूँगा।

हरिनाथ हैरान रह गया। वह यह नही जानता था कि व्यापारी उसे उस तस्वीर का पैसा नही देना चाहता था, इसीलिए तस्वीर में कमियाँ ढूंढ रहा है। हरिनाथ ने कहा- मेरे मालिक! यदि आप चाहे तो मैं आपकी यह तस्वीर दुबारा बना देता हूँ परन्तु उसके लिए मुझे कुछ समय चाहिए। हरिनाथ ने व्यापारी के सफ़ेद बालो को ढक दिया और दुबारा तस्वीर लेकर व्यापारी के पास गया। व्यापारी ने हरिनाथ की बनाई हुई तस्वीर को दुबारा देखा और फिर से कमियाँ निकालना शुरू कर दिया। व्यापारी ने कहा- इस तस्वीर में तुमने मेरी एक आँख को बड़ी और दूसरी आँख को छोटा बनाया हुआ है, मैं इस बकवास तस्वीर का एक भी रुपया नही दूँगा।

हरिनाथ ने फिर से उस तस्वीर को सुधारने की पेशकश की। व्यापारी राज़ी हो गया और उसने हरिनाथ को कुछ समय दिया और उस तस्वीर को सुधारने को कहा। हरिनाथ हर बार तस्वीर बनाकर व्यापारी के पास जाता और हर बार व्यापारी उस तस्वीर में कोई न कोई कमी निकाल कर उसे वापस भेज देता था। अंत में जब हरिनाथ से पूरी तरीके से हार गया तो वह बीरबल के पास सहायता माँगने गया।

बीरबल ने हरिनाथ से कहा तुम उस व्यापारी को मेरे यहाँ आने का आमंत्रण दो। कंजूस व्यापारी बीरबल के घर पहुँचा। बीरबल ने व्यापारी से कहा- हरिनाथ का कहना है कि जैसा तुमने कहा था उसने बिल्कुल वैसी ही जीवंत तस्वीर बनाकर तुमको दी पर तुमको वह तस्वीर पसन्द न आई।

कंजूस व्यापारी ने कहा- सही कहा, यह तस्वीर कहि से भी मेरी जैसी नही लगती है।

बीरबल ने हरिनाथ से कहा- ठीक है हरिनाथ, तुम इस आदमी का वैसा ही चित्र बनाओ जैसा तुम्हे पसन्द हो और फिर बीरबल व्यापारी की तरफ घूमे और बोले- हरिनाथ आपकी दूसरी तस्वीर बनायेगा, आप कल आकर अपनी तस्वीर ले जाइएगा और आपको इस तस्वीर के एक हज़ार सोने के सिक्के देने होंगे क्योंकि मैंने स्वयं देखा है कि हरिनाथ बिल्कुल जीवंत तस्वीर बनाता है। व्यापारी ने मन मे सोचा चित्रकार एक दिन में जो तस्वीर बनायेगा। उसमे बहुत सी गलतियाँ होंगी और उसमें गलतियाँ निकालने में ज्यादा मेहनत भी नही करनी पड़ेगी।

अगले दिन जब व्यापारी बीरबल के घर पहुँचा तो बीरबल उसे लेकर एक कमरे में गया। उस कमरे में एक चित्र रखा हुआ था जोकि कपड़े से ढका हुआ था। जब व्यापारी ने चित्र पर से कपड़ा हटाया तो वह हैरान रह गया, वह कोई चित्र नही अपितु एक शीशा था। बीरबल ने व्यापारी से कहा- उम्मीद करता हूँ आप इस चित्र से पूरी तरह सन्तुष्ट हो गए होंगे और आपको इसमे कोई गलती नज़र नही आ रही होगी।

व्यापारी समझ गया कि वह बीरबल से हार चुका है। उसे चित्रकार को चित्र के सौ सिक्के के अलावा एक हज़ार सिक्के उस शीशे के भी देने पड़े।



बीरबल ने पहचानी अज़नबी की मातृभाषा


एक बार एक अजनबी व्यक्ति बादशाह अकबर के दरबार में आया और बादशाह के सम्मान में झुककर उसने कहा, ”जहांपनाह! मैं बहुत सारी भाषाओं में बात कर लेता हूं। मैं आपकी बहुत अच्छी सेवा कर सकता हूं, यदि आप मुझे अपने दरबार में मंत्रियों में शामिल कर लें।“

बदशाह ने उस व्यक्ति की परीक्षा लेने का निश्चय किया। उसने अपने मंत्रियों को उस आदमी से विभिन्न भाषाओं में बात करने को कहा। अकबर के दरबार में अलग-अलग राज्यों के लोग रहते थे। हर किसी ने उससे अलग-अलग भाषा में बात की। प्रत्येक मंत्री जो आगे आकर उससे अपनी भाषा में बात करता, वह व्यक्ति उसी भाषा में उत्तर देता था। सारे दरबारी उस व्यक्ति की भाषा कौशल की तारीफ करने लगे।

अकबर उससे बहुत प्रभावित हुआ। उसने उसे अपना मंत्री बनने की पेशकश की। किन्तु व्यक्ति ने कहा, ”मेरे मालिक! मैंने आज कई भाषाओं में बात की। क्या आपके दरबार में कोई है, जो मेरी मातृभाषा बता सके।“

कई मंत्रियों ने उसकी मातृभाषा बताने की कोशिश की, परंतु असफल रहे। वह व्यक्ति मंत्रियों पर हंसने लगा। उसने कहा, ”मैंने यहां के बारे में सुना है कि इस राज्य में बुद्धिमान मंत्री रहते हैं। किंतु मुझे लगता है कि मैंने गलत सुना है।“ अकबर को बहुत शर्मिदंगी हुई। वह बीरबल की ओर सहायता के लिए देखने लगा। उसने बीरबल से कहा, ”कृप्या मुझे इस अपमान से बचाने के लिए कुछ करो।“

बीरबल ने उस व्यक्ति से कहा, ”मेरे दोस्त! आप थके लग रहे हैं। आपने निश्चय ही यहां दरबार तक आने में बहुत लंबा रास्ता तय किया है। कृप्या आज आप आराम करें। मैं कल सुबह आपके प्रश्न का जवाब दे दूंगा।“ वास्तव में व्यक्ति बहुत थका हुआ था। उसने बादशाह से जाने की आज्ञा ली और चल दिया। उसने स्वादिष्ट खाना खाया और शाही अतिथि कक्ष में आराम करने चला गया।

सभी मंत्रियों के जाने के बाद अकबर ने बीरबल से कहा, ”तुम इस व्यक्ति के प्रश्न का उत्तर कैसे दोगे?“ बीरबल ने कहा, ”जहांपनाह! चिंता नहीं करें। मेरे पास एक योजना है।“

उस रात जब महल में हर कोई गहरी नींद में सो रहा था, तब बीरबल ने काला कम्बल अपने चारों ओर लपेटा और चुपके से अजनबी व्यक्ति के कक्ष में गया। बीरबल ने घास की टहनी से व्यक्ति के कान में गुदगुदी की। व्यक्ति तुरंत उठ गया। किंतु जब उसने अंधेरे में काले शरीर वाला देखा तो उसने सोचा कि वह भूत है। उसने उडि़या भाषा में चिल्लाना शुरू कर दिया, ”हे भगवान जगन्नाथ, मुझे बचाओ! मुझ पर भूत ने हमला कर दिया है।“

अचानक बादशाह ने अपने मंत्रियों सहित कक्ष में प्रवेश किया। बीरबल ने कम्बल को फ़र्श पर फेंक दिया और कमरे में प्रकाश कर दिया। उसने व्यक्ति से कहा, ”तो तुम उड़ीसा निवासी हो और तुम्हारी मातृभाषा उडि़या है। मैं सही कह रहा हूं ना,“ व्यक्ति ने बीरबल से कहा कि वह सही है।

अकबर ने कहा, ”एक आदमी चाहे कितनी भी भाषाएं बोल ले, लेकिन वह जब डरता है तो अपनी मातृभाषा में ही चिल्लाता है।“ बीरबल ने पहेली को हल कर दिया। अकबर ने उसकी चतुराई के लिए उसकी प्रशंसा की।

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