Best Horror Stories In Hindi | डरावनी कहानियाँ हिंदी में | 2021

इस Blog में आपको best horror stories hindi में पढ़ने को मिलेंगी जो आपने अपने दादा दादी से सुनी होंगी। ये Best Horror Stories In Hindi बहुत ही डरावनी है। भूतों और प्रेतों के किस्से तो आपने अपने बचपन मे बहुत सुने होंगे। हमने भी इस ब्लॉग में best horror stories hindi में लिखा है जिसको पढ़कर आपको बहुत ही ज्यादा आनंद मिलेगा और आपका मनोरंजन भी होगा। इसमे कुछ best Horror Stories In Hindi 2021 दी गयी है। जिसमे आपको नयापन अनुभव होगा। यदि आप पुरानी कहानियाँ पढ़कर बोर हो गए है तो यहाँ पर हम आपको best horror stories hindi दे रहे है जिसको पढ़कर आपको बहुत ही ज्यादा मज़ा आने वाला है।

Best Horror Stories In Hindi
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डरावनी रात Best Horror Stories In Hindi


सर्दी की उस रात भी मेरे माथे पर पसीने की बूँदें बरस रही थी। नहीं! वह पसीना गर्मी की वजह से नहीं बल्कि डर की वजह से था। मेरा नाम साक्षी है, १५ जनवरी २००७, मैं केवल 14 वर्ष की थी जब मेरे माता-पिता कुछ जरूरी काम से बाहर थे और हमारे लिए (मैं, मेरे बड़े और छोटे भाई) एक वफादार व्यक्ति छोड़कर गए थे ताकि वो हमारी देखभाल कर सकें।

उन्हें इस बात का बिलकुल भी अंदाजा नहीं था कि वो एक चोर को अपने कीमती सामान की रक्षा करने के लिए कह रहे थे। उनके जाने के पहले दिन ही उसने अपना रंग दिखा दिया। 

उस रात ज्यादा ही अंधेरा था और उस व्यक्ति ने जानबूझकर सभी कमरों की रोशनी बंद कर दी। मुझे पता भी नहीं था कि क्या हो रहा है ? मेरी तरफ एक हाथ आ रहा है, कौन है, और वह क्या कर रहा है ? (वह मेरे लिए सभी डरावनी कहानियों से ज्यादा ही डरावनी रात थी क्योंकि वह पल किसी भी भूत से कहीं ज्यादा भयानक था।)

मैं धराशायी होकर कुछ समय तक सुध-बुध खोए पूरी रात सोचती रही कि वह कौन था? इसी बीच मेरी कुतिया (रूबी) आई और दरवाजे पर दस्तक हुई। उसने कुछ गंध ली (यह पता लगाने के लिए कि वह कौन था ?) शायद उसे भी भी किसी वारदात का एहसास हो गया था।

बाहर बहुत ठंड थी, मैंने सोचा कि उसे ठंड लग सकती है इसलिए मैंने उसे अपनी बाँहों में ले लिया और फिर फूट-फूटकर रोना शुरू कर दिया।

वह विनम्रता से मेरी गोद में बैठी थी और मेरी आँखों में देख रही थी। हम दोनों उस रात सो नहीं सके और रात भर हमने वाशरूम में बिताया।

कुल तीन दिन तक हर रात हम वाशरूम में बंद रहे क्योंकि यह सबसे सुरक्षित जगह थी। अगली रात जब वह आया, दरवाजा खटखटाया और उसे खोलने की कोशिश की तो मैं बहुत डरी हुई थी लेकिन जब रूबी ने भौंकना शुरू किया तो वह चिल्लाया और वहाँ से वापस चला गया। आखिरी और 5 वें दिन जब मैंने अपनी उम्मीद खो दी और मुझे यह डर भी था कि मेरे भाइयों को पता चल जाएगा तो क्या होगा ? कुल 4 दिनों तक यही चलता रहा और पाँचवें दिन मैंने कुछ साहस इकट्ठा किया और कहा, "नहीं, ऐसा मत करो। 

उन्होंने पूछा, "क्या कहा? "

और कहा, "बस, आज और आखिरी बार।"

कमरे की रोशनी चालू थी इसलिए मुझमें अधिक आत्मविश्वास हुआ। मैंने अपने बड़े भाई को देखा लेकिन बाद में एहसास हुआ कि यह और भी बदतर हो सकता है इसलिए मैंने भाई को आवाज देना जरूरी नहीं समझा और फिर उसे लात मार दी।

अगली सुबह मेरे लिए एक सुकून वाली सुबह थी क्योंकि मेरी माँ वापस आ गईं थी और वह मुझे संभालने के लिए वह काफी थी।

अगली सुबह हम (मैं और रूबी) वाशरूम से बाहर आए तो मेरी माँ मुझ पर हँसने लगी। उन्हें लगा शायद फिर मैंने कोई डरावनी मूवी देखी है और खुद को बंद कर रखा है।

उस रात मैंने अपनी मां को रात में अपने कमरे में ही रहने के लिए कहा।

वो मुझसे पूछती रही कि कुछ हुआ था, "मैंने कहा नहीं, कुछ भी नहीं हुआ।"

मैं उन्हें शायद कभी नहीं बताऊँगी कि मैंने कुछ रातों में क्या महसूस किया है।

मैंने माँ से कहा, "आप बात करते रहो और मैं सो जाती हूँ।"

थोड़ी देर बाद मैंने सोने का नाटक किया क्योंकि माँ बहुत ही थकी हुई थी।

यह वारदात अभी भी मुझे परेशान करती है, जब रोशनी बंद होती है, लगता है कि वह अंदर आ रहा है। हर रात मुझे वाशरूम में रहना क्यों पसंद है क्योंकि यह मेरी सबसे सुरक्षित और शांतिपूर्ण जगह है।

सबसे दुख:द बात यह थी जब मेरी रूबी मर गई। मैंने एक सप्ताह तक कुछ भी नहीं खाया और बस रोती ही रहती थी।

रूबी के जाने का दुःख सभी को था पर मेरी रूह ही जानती थी कि मैं रूबी को कभी नहीं भूल सकती क्योंकि उसने सब कुछ देखा था। हर रात मेरे साथ मेरे डर को महसूस किया था। सिर्फ हम दोनों ही उस घटना के बारे में जानते थे और उसका साथ मेरे लिए हौसला बढ़ाने जैसा ही था। रूबी मेरे जिंदगी की सबसे बेहतरीन दोस्त थी और आज भी वो मेरे दिल में और मेरी यादों में जिंदा है।

इस घटना के बाद मैं टाॉपर से एक औसत छात्र बन गई।

मैं अक्सर रातों में जागती रहती थी और मेरा ध्यान पढ़ते समय आस-पास की तरफ बढ़ता रहता था। हर वक़्त डर लगता था जैसे कोई मेरी ओर तो नहीं आ रहा हैं, या फिर कोई मुझे देख तो नहीं रहा है।

मेरे मन में आज भी एक डर है। अब मैंने पहले जैसे हँसना भी छोड़ दिया, लोगों से ज्यादा बातचीत भी नहीं रही। अब ना वो हँसी रही और ना ही वो साक्षी रही।

केवल उन चार रातों ने मेरी हर एक रात को डरावना बना दिया।।



होली की वो डरावनी रात Best Horror Stories In Hindi


 आज होली है,सबके हाथ गुलाल से भरे है, सबकी रंग बिरंगी हथेलियाँ और चेहरे पर ख़ुशियाँ फैली हुई थी। 

  मेरी भी हथेलियाँ गुलाल के रंग बिरंगे रंगों से अछूती नहीं है, पर इसके साथ साथ मेरा मन भी भरा हुआ है एक पुराने अतीत से। जो उस रात के डर को हर साल होली पर मेरे मन को घेर लेती है। 

जब भी ये होली वापस आती है, तो वो अपने साथ उस मनहूस रात की यादें भी लेकर आती है, होली में सब खुश होते है सिवाय मेरे, मैं भी क्या करूँ, वो रात भुलाये नहीं भूलती। 


आज से तीन साल पहले की बात है, बिजधारा गाँव में रहता हूहूँ हमारे गाँव में जीवन यापन का कोई अच्छा साधन तो है नहीं, तो लोग नौकरी की तलाश में दूर दूर शहर की तरफ चले जाते थे।  मेरे गाँव के करीब एक छोटा सा शहर था, भवानीपुर ...

वो हमारे गाँव से तक़रीबन 7 किलोमीटर दूर रहा होगा, मैं उसी शहर के एक दुकान में नौकरी करता था, मेरा घर जैसे तैसे चल जाता था। कभी कभी गाँव के लोगो के जरूरत का सामान भी शहर से खरीद कर उनके घर पहुंचा देता था, उसमे भी कुछ पैसों की आमदनी हो जाती थी। 


मैं रोज पैदल ही शहर आना जाना करता था, इस एक तरफ के सफर में एक घंटा लग जाता था, पर करता भी क्या। एक ही बस चलती थी गाँव में, सुबह 11 बजे फिर वही बस शाम को 4 बजे। 

होली से एक दिन पहले की बात है, गाँव के लोगो ने कुछ रंगों और पिचकारियों का आर्डर दिया था, मैं अपने दुकान का काम खत्म होने का इंतज़ार कर रहा था, आज बाजार में होली के कारण चहल पहल ज्यादा थी इसलिए हमारे दुकान पर भीड़ भी बहुत थी दुकान बंद करते करते करीब 10 बज गए। 

अब मुझे कुछ रंग और पिचकारियां भी खरीदनी थी, इसलिए मैं बाजार में ही रुक गया, और सामान की खरीदारी करने लगा। ज्यादा देर होने की वजह से कई दुकान बंद भी हो गई थी, पर ख़ुशी की बात ये थी कि मुझे मेरा सारा सामान मिल गया। आज मैं बहुत लेट हो गया था, लगभग 11 बजे मैं बाजार से घर की तरफ निकला, रात ज्यादा हो जाने के कारण सड़क एक दम वीरान पड़ी थी। ये वही रास्ता था जिसपर मैं रोज़ ही आया जाया करता था, पर आज एक अलग ही बेचैनी थी, डर था, सड़क सुनसान थी। दोनों तरफ पेड़ो और जंगलों की कतारे, गाँव की सड़को पर तो स्ट्रीट लाइट होती नहीं है, पर गनीमत ये था कि आज पूर्णिमा की रात थी। इसलिए सड़क साफ़ नजर आ रही थी, कभी कभी जब चमगादड़ चीखते हुए करीब से निकल जाते तो मेरी हालत ख़राब हो जाती। झींगुरों की करकर्राहट एक शांत डर पैदा कर रही थी, पर कहते है न कि इंसान जब मुसीबत में हो तब चलने के अलावा और कोई रास्ता नहीं होता है। इसलिए मैं भी चलता जा रहा था, मैं गाँव के करीब पहुंच गया अब मेरा गाँव ३०० मीटर होगा, यही पर एक रेलवे फाटक था। 

   

मैं इसी रेलवे फाटक को पार कर रहा था कि वहां मुझे एक बच्चा रोता हुआ दिखाई दिया करीब एक साल का बच्चा होगा। मुझे लगा गाँव के ही किसी का बच्चा होगा, या जिसका भी हो कल सुबह पता चल जायेगा। ऐसे उस बच्चे को वहां छोड़कर आने का मेरा मन नहीं हुआ। मैंने उसे गोद में उठाकर घर की तरफ चल दिया। पांच मिनट ही चला हूँगा कि मुझे वो बच्चा भारी लगने लगा, पर मैंने सोचा कि पास में सामान है, शायद इसलिए भारी लग रहा है। 

अगले पांच मिनट में बच्चा और भारी लगने लगा, अब मुझे कुछ अजीब लगा, पर मैं घर पहुंचने की जल्दी में ध्यान देना जरुरी नहीं समझा। फिर कुछ ही मिनट बाद मेरे पीछे कुछ घिसटने की आवाज़ आने लग, ये आवाज़ लगातार मेरे कानों में आ रही थी। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो उस बच्चे का पैर इतना लम्बा हो गया था कि वो जमीन पर घिसटने लगा था। मेरी तो डर से हालत ख़राब हो गई, डरते डरते मैंने उस बच्चे की शक्ल की तरफ देखा, तो उस बच्चे ने एक शैतानी मुस्कान दी। ये देख कर अब मेरी हिम्मत ने जवाब दे दिया, मैं सब सामान और बच्चे को वहीँ फेंक कर बेतहाशा भागने लगा। 


मैं पीछे मुड़कर भी नहीं देख रहा था, मैं भागे जा रहा था, मैं अपने घर से थोड़े ही दूर रहा हूँगा कि एक सफ़ेद साड़ी में एक औरत अपनी बाहे फैलाये मेरे रास्ते में खड़ी हो गई। वो करीब मुझसे 50 मीटर की दूरी पर होगी, मैं बेतहाशा दौड़ता रहा, और उस चुड़ैल के करीब पहुंचने से पहले मैं भागकर दूसरे के घर के आंगन से पहले की दीवार जोकि 4 फिट ऊचाई की होगी उसे कूदकर मैं दूसरे के घर में चला गया। दरवाज़ा खुलवाकर वही पूरी रात रुका, गाँव में तो सब एक दूसरे को पहचानते ही है, सुबह मैं अपने घर गया , ये बात सारे गाँव में फ़ैल गई, सबने कहा कि रेलवे ट्रैक पर कई छलावे होते है, हमें सावधान रहना चाहिए। 

तब से ये होली रंगों और ख़ुशियों के साथ साथ मेरे लिए डर भी लेकर आती है ......



वो मनहूस तालाब Best Horror Stories In Hindi


वो मनहूस रात भुलाये नहीं भूलती, कुछ गलतिया हमारी भी थी, अभी अभी तो हमारा बचपना गया था और जवानी ने हमारा स्वागत कर रही थी।

कहते है ये उम्र सबसे ज्यादा एनर्जिटिक और खतरनाक होता है, इस उम्र में हम सबका मज़ाक उड़ाते है, खुद को सबसे ज्यादा समझदार और ताकतवर समझते है। 

पर यही तो ग़लती करते है, मेरा नाम ऋषि है, और मैं बुलंद शहर के एक गाँव में रहता हूँ, मेरी उम्र १७ साल है। हम 4 दोस्त रोज़ अपने गाँव से बहार दूसरे गाँव क्रिकेट खेलने जाते थे, कुछ लड़के दूसरे गाँव से भी आते थे, हम सब साइकिल से आना जाना करते थे। मुझे आज भी याद है, हमारे गाँव और दूसरे गाँव के बीच ही उस पतली सड़क के बराबर से ही लगा हुआ वो इमली तालाब था। उस तालाब के किनारे बहुत से इमली के पेड़ थे शायद इसलिए उसका नाम इमली का पेड़ था। गाँव के लोगो का कहना था कि यहाँ कई लोगो ने या तो डूब कर या इन पेड़ो पर फाँसी लगा के आत्महत्या की है। ये तालाब मनहूस है शाम को अँधेरा होने के बाद यहाँ कोई जाना पसंद नहीं करता था, कोई जाये भी कैसे एक दम जंगल सुनसान जगह में पसरा हुआ था ये तालाब।  


उस दिन हम क्रिकेट खेलकर ६ बजे तक फ्री हो गए थे हम, और उस दिन क्रिकेट में हमें 50 रुपये भी जीते थे। मेरे दोस्त संदीप और विजय तो अपनी साइकिल से घर चले गए, पर मेरे और मेरे दोस्त सोनू के दिमाग में कुछ अलग खिचड़ी पक रही थी।

सोनू ने कहा - भाई आज 50 रुपये मैच में जीते है तो आज कुछ तूफ़ानी करते है, 

मैंने कहा - अबे बकलोल का तूफानी करेगा रे।

सोनू - अरे आज सिगरेट पीते है साला मजा आ जायेगा। 

मैंने कहा - अगर पकड़े गए न बेटा तो मज़ा न सजा बन जाएगी, एक बार फिर से सोच लो।

सोनू - अरे यार इतना डरेंगे तो जियेंगे कैसे हम बच्चे थोड़े ही है, फिर भी अगर तुम को डर लगता है न कि कोई देख न ले तो ....तो हम इधर तालाब के किनारे सिगरेट पी लेंगे।

इधर तो कोई नहीं आएगा न जी... अब खुश।

मैंने कहा - पागल तो नहीं हो गए हो सिगरेट पीने के चक्कर में वो तालाब मनहूस है सुने नहीं हो क्या ...

सोनू ( हँसते हुए ) क्या बच्चों वाली बात कर रहे हो ऋषि ये सब कहानियाँ बच्चों के लिए बनाई जाती है भूत भूत कुछ नहीं होता।

नाम ऋषि है और डरते भूतों से है ( हँसते हुए मज़ाक उड़ने लगा )


मैं भी उसके साथ जाने को तैयार हो गया, क्या करता हमारा पहली बार था इसलिए 2 सिगरेट ख़रीदे, और पहुँच गए तालाब।

सात बजने वाले थे, अंधेरा होने लगा था झींगुरों की आवाज़ शुरु हो गई थी, वहां पहुँचने के बाद चाँद नहीं दिखा तो एहसास हुआ, अरे यार आज तो अमावस्या है। मेरी तो बैंड बजी पड़ी थी पर जवानी का जोश था, हिम्मत दिखानी थी सोनू को। तो मैं भी उसके साथ अपना डर छिपाये चला गया।

दोनों ने सिगरेट जलाई और पीने लगे, वही तालाब के किनारे बैठ गए थे हम। तभी तालाब में हमने कुछ तैरता देखा, शायद कागज़ के दोने में कोई दिया जला कर पानी में छोड़ गया था। थोड़ी देर उसे देखते रहने के बाद मुझे अचानक से आभास हुआ कि इस तालाब पर तो कोई नहीं आता है, वो भी रात को तो फिर ये किसकी हरकत है।

मैंने डरते हुए सोनू से कहा - सोनू देख मेरे भाई घर चलते है, जितनी सिगरेट पी ली वही बहुत है।

सोनू - अरे ऋषि तू डर क्यूँ रहा है।

ऋषि - अरे तालाब में देख वो दीया , 

सोनू ने दीया को देखा फिर हँसते हुए बोला अब तू देख उस दीये को ...

देख क्या होता है, ये कहकर सोनु ने एक पत्थर उठाया और उसने उस दीया को निशाना लगाकर मारा।

मैं चिल्ला चिल्ला कर उसे मना कर रहा था पर वो नहीं माना।

पत्थर जैसे ही उस दिया पर लगा, चमगाड़ो की आवाज़ गूंजने लगी चमगादड़ पूरे तालाब के ऊपर उड़ने लगे। वो दीया या तो बुझ गया था या ग़ायब हो गया था पता नहीं। तभी कुत्तों की रोने की आवाज़ आने लगी हवाएँ तेज हो गई ये सब क्या हो रहा था, अब तो सोनू भी डर गया था, हम दोनों डर के मारे खड़े हुए और वहां से भागने लगे। तभी सोनू की तेज़ चीखने की आवाज़ आई। मैं अब तक भाग ही रहा था पर सोनू की चीखने की आवाज़ से मैं पीछे मुड़ा तो देखा।

 

 कोई अदृश्य शक्ति सोनू के पैरो को पकड़ कर घसीटती हुई तालाब में ले जा रही है मैं चिल्लाता रहा छोड़ दो उसे। हमें माफ़ कर दो अब हम कोई ग़लती नहीं करेंगे। पर वो अदृश्य शक्ति सोनू को तालाब के अंदर ले गई। मैं रोता बिलखता रहा पर कोई फ़ायदा नहीं हुआ। 15 मिनट बाद मैंने सोचा मैं घर जाकर सबकुछ सबको सच सच बता दूँगा। मैं घर की तरफ कदम बढ़ाये ही थे कि सोनू ने पीछे से रोते हुए मुझे आवाज़ दिया।

ऋषि भाई मुझे भी ले चल मेरे साथ बहुत बुरा हुआ है, मैं उसे अपने साथ घर ले आया मैं अंधेरे में उसकी हालत देख नहीं सका पर वो कीचड़ में सना हुआ था नाक और कान में कीचड़ भर चुका था। मैं भी उस वक़्त क्या करता फटाफट उसे घर ले गया उसको उसके घर के बहार छोड़ के मैंने उससे कहा कि अच्छे से नहा ले नाक कान का कीचड़ सब जल्दी साफ़ कर ले और ये बोल कर मैं घर चला गया। पूरी रात मुझे नींद नहीं आई, सुबह सुबह उठते ही मैंने सारी बातें अपने घर पर बता दी। ये बातें सुनकर मेरे पापा माँ भैया सब बहुत गुस्सा हुए और मुझे लेकर पहले सोनू के घर गए कि पता चले सोनू की क्या हालत है।


जब सोनू के घर गए तो सब परेशान थे सोनू कल से घर ही नहीं आया था, सब पुलिस ऍफ़ आई आर करवाने की सोच रहे थे। तभी वहां हम पहुँच गए। पापा ने सारी बात सोनू के घरवालों को बताया। उसकी माँ तो सुनते ही छाती पीट पीट कर रोने लगी। गाँव के कुछ लोग इकट्ठा हुए जिसमे मैं मेरे और सोनू के पापा भी थे। हम सब उसी मनहूस इमली तालाब पर गए, जहाँ ये सब घटना हुआ था। सोनू की लाश वही कीचड़ में सनी हुई मिली, नाक मुँह और कान में बहुत बुरी तरह से कीचड़ ठूसा गया था। पुलिस भी आई पर कुछ समझ नहीं आया। पुलिस वालो का कहना था कि ये मौत पानी में डूबने से हुई है। पर मुझे पता था कि मौत हुई नहीं मारा गया था। तब से मैं कभी उस तालाब की ओर कभी नहीं गया ...


क्या आपके इधर भी है कोई तालाब ध्यान रखना.....



लिली का रहस्य Best Horror Stories In Hindi


चारो और से पुष्प वर्षा हो रही है , मंगल ध्वनिया बज रही है , शहनाइयां की मधुर आवाज सुनाई दे रही है । दुल्हन शादी के लाल जोड़े में सजी हुई , धीमे कदमो से चल के आ रही थी ।वह रवि के पास बैठ गयी और पंडित ने उसका हाथ रवि के हाथ मे दे दिया । रवि उसके मुलायम हाथों का स्पर्श पाकर, पुलकित हो गया , और कस कर दबाने लगा , पर ये क्या ।ये तो कड़क हो गये बिल्कुल लोहे की तरह दब ही नही रहे थे । 


  घबराकर रवि की नींद खुल जाती है वो देखता क्या पानी की बॉटल को दबा रहा था । वह सपना देख रहा था ।वह उठ के बैठ जाता है । उसे खुद पर ही हंसी आती है । रवि एक ,अनाथ अकेला लड़का था । उसके आगे पीछे कोई नहीं था एक छोटी सी दुकान चलाता था जिससे उसका गुजर-बसर अच्छे से हो जाता था । उमर अब 32 पर हो चुकी थी , और अभी तक उसकी शादी नहीं हुई थी । तो वह दिन रात अपनी शादी के सपने देखा करता था । होने वाली दुल्हन के सपने देखा करता था ।


एक दिन पड़ोस में रहने वाली मौसी आई और उसने रवि से कहा कि मैंने तुम्हारे लिए एक दुल्हन देखी है । लड़की अनाथ है कोई भी नहीं आगे पीछे , बिल्कुल तुम्हारी तरह । तुम कहो तो मैं बात आगे बढ़ाऊ । वह अपने दूर के चाचा के घर रहती है । अंधा क्या चाहे दो आंखें रवि के मन में फिर से शादी के लड्डू फूटने लगे।उसने हां कह दिया । "ठीक है , मुझे भी शादी करनी है लड़की अच्छी रही तो और क्या चाहिए घर को संभाल ले । मेरे साथ जैसा में रहता हूँ वैसी रहे तो और क्या चाहिए मुझे ।"


फिर आखिर बात पक्की हो गई । कुछ ऐसा संयोग बना की रवि लड़की नही देख पाया ना लड़की के फोटो देख पाया ।फिर मौसी ने 1 दिन बताया कि लड़की भी तैयार है शादी करने के लिए मगर उसकी एक शर्त है कि वह हिंदू रीति रिवाज से शादी नहीं करेगी , क्योकि वह क्रिशचन है । इसलिये बस कोर्ट में जाकर शादी करेगी । रवि को क्या एतराज हो सकता था वह भी मान गया और आखिर उसकी शादी लिली से हो गयी ।

रवि जात पात ,धर्म को मानता नहीं था इसलिये वह तैयार हो गया था शादी करने को ।आज रवि का वही सपना साकार हो रहा था ।उसने सुहाग सेज पर बैठी लिली को घूंघट करके बैठी देखा । 


रवि जब उसका घूंघट उठाता है तो , देखकर हैरान रह जाता है । लिली बहुत ही सुंदर थी बिल्कुल स्वर्ग की अप्सरा जैसे , कजरारे मद भरे नैना ,गोरा रंग , लाल रस से भरे होठ ऐसा लग रहा था जैसे कोई परी उतर के उसके सामने बैठी हो। रवि को अपनी किस्मत पर यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसे इतनी अच्छी दुल्हन मिली हैं । उसने मन ही मन भगवान का बहुत धन्यवाद किया कि भगवान मुझे इतनी अच्छी जीवनसाथी मिली ।

फिर लिली ने उससे बोलना चालू किया की आज हमारी सुहाग की रात है मैं आपसे एक वचन चाहती हूं । 


"क्या कहो" 


"मैं यह चाहती हूं कि आप मुझे छुओगे नहीं ।"


तो रवि कहता है "ऐसा क्यों ।"


तो लिली कहती है "पहले आप मेरी पूरी बात तो सुन लो ।पहले मैं यह चाहती हूं कि आप मुझे कुछ समय के लिए जब तक मैं ना कहूं छुओगे नहीं । और मुझसे कुछ सवाल भी नहीं करोगे।"


"रवि खामोश रहता है ।वह कहती है आपने मुझसे कुछ भी सवाल पूछा तो आप मुझे हमेशा हमेशा के लिए खो दोंगे ।तो रवि मरता क्या न करता हां कह देता है ।सके सपनों पर पानी फिर जाता है ।सुबह वह लिली को साड़ी पहन के काम करते देखता है ,तो वह लिली को इस रूप में देख कर बहुत खुश होता है।रवि देखता है लिली बहुत अच्छी हाउसवाइफ है। उसने पूरे घर को बहुत जतन से सजाया है । उसके लिए अच्छा अच्छा खाना बनाती है । उसकी हर इच्छा का ख्याल रखती । वह देखती हमेशा कि रवि को कुछ तकलीफ तो नहीं है । थोड़े से खर्च में भी वह घर को बहुत अच्छे से चलाती ।

रवि उससे बहुत प्यार करने लगा था ।मगर जब भी रवि उसके पास जाता तो हमेशा वह अपनी शर्त याद दिला देती थी । कि मुझे छूना मत ।


उनकी गृहस्थी अच्छे से चल रही थी ।एक दिन रात को 2:00 बजे रवि की नींद खुल जाती है । तो वह देखता है की लिली अपने बेड पर नहीं है । तो वह घबरा जाता है। वह सोचता है बाथरूम में गई होगी । और जब कुछ देर बाद लिली नहीं आती है । तो उठ कर देखता है मगर लिली नहीं दिखती है ।वह इंतजार करने लगता है । इतने में क्या देखता है दरवाजा खुलता है और बाहर से लिली आ रही है ।उसने लाल फुल गाउन पहना हुआ है , और लाल लिपिस्टिक लगाया था वह पूरे मेकअप में थी और पसीने पसीने हो रही थी । रवि को देखकर वह थोड़ा सकपका जाती है ।


रवि पूछता है "कहाँ गयी थी तुम मैं कितना परेशान हो रहा था ।"


तो वह कहती है "मैंने आपसे कहा था न कुछ मत पूछना ।"


रवि चुप हो जाता है वह कुछ भी नहीं पूछता है । फिर भी रवि के मन में बहुत से प्रश्नों उमड़ रहे थे ।सुबह देखता है कि लिली बिल्कुल नॉर्मल दिख रही है रात की लिली और सुबह वाली लिली में बहुत फर्क है ।दूसरे दिन भी रवि को नींद नहीं आती है । वह जागता ही रहता है । देखता है पास में लिली सो रही है ।एकदम से झपकी लग जाती है । और फिर आंखें खोल कर देखता है लिली गायब ।रवि फिर परेशान हो जाता है , सोचता रहता है कहां गई होगी लिली कहां गई होगी ।उसे दरवाजे पर फिर आहट होती है तो रवि आंखें बंद करने का नाटक करता है और देखता रहता है ।


 लिली उसी ड्रेस में उसी लाल गाउन में लाल लिपस्टिक बाल खुले हुए और आ रही है पसीना पसीना है इस बार उसे यह भी देखा कि लिली के मुंह पर खून भी लगा हुआ है । वह बहुत घबरा जाता है पर सोने का नाटक करता रहता है ।फिर देखता क्या है लिली बाथरूम में जाती है ।नहाती है शावर की आवाज आती है उसके बाद गाउन पहनती वापस आकर सो जाती है । लगातार तीसरे दिन भी यही होता है । रवि बहुत घबरा जाता है उसे लगता है क्या है मेरी बीवी कौन है आखिर, मैं उससे पूछ भी नही सकता ।उसने कहा था अगर कुछ भी सवाल पूछोगे तो तुम मुझे खो दोगे ।मगर अगर ऐसा ही चलता रहा तो क्या होगा और मुझे क्यों नहीं हाथ लगाने देती मुझे लिली से पूछना ही होगा ।पर सुबह जब लिली को अपने लिए परेशान होते देखता । काम करते देखता । एक परफेक्ट हाउसवाइफ देखता । तो उसे लगता है कि अगर कुछ हो गया और लिली मुझे छोड़ कर चली गई तो क्या होगा ।

 फिर एक दिन वो निश्चय करता है कि वह जाकर देखेगा की लिली आखिर जाती कहाँ है ।


फिर वह क्या करता है रात को सोने का नाटक करता है देखता है लिली पास में सो रही है फिर एकदम से लिली की आंखें खुल जाती है वह देखता उसने अपने पूरे कपड़े उतार दिये है । और वही लाल गाउन डाल रही है । अच्छे से तैयार हो रही है । फिर घर से निकल जाती है ।उसके पीछे पीछे रवि भी चला जाता है ।रवि देखता क्या है लिली सड़क पर एक साइड खड़ी हुई है । एक कार आ रही है तो लिली उसको रोकने का अंगूठे से लिफ्ट का इशारा करती है कार आकर उसके पास रुक जाती है उसमें से एक आदमी निकलता है लिली से कुछ बातें करता है और लिली उसकी कार में बैठ जाती है और कार आगे बढ़ जाती है । रवि यह देखकर हैरान रह जाता है ।वह वापस आकर अपने बिस्तर पर सो जाता है ।लिली आती है वैसे ही उसके मुंह पर खून लगा हुआ था । आकर नहाती है नाइट ड्रेस पहन के सो जाती है । 

अब दूसरे दिन रवि की उससे कुछ पूछने की हिम्मत नहीं होती है ।अब दूसरे दिन रात को फिर वही होता है रवि सोने का नाटक करता है लिली तैयार होकर निकल जाती है रवि बार अपनी गाड़ी ले लेता है और से थोड़ी पीछे रहता है कि लिली को एहसास ना हो। 

फिर वही होता है लिली एक गाड़ी में लिफ्ट लेकर बैठ जाती है ।रवि उसके पीछे पीछे जाता है वह क्या देखता है कर एक पेड़ के पास रुक गई है । सुनसान जगह है ।

ह आदमी और लिली दोनों कार से नीचे उतर आते हैं और गले लग जाते है उसके बाद का जो दृश्य था वह बहुत ही भयानक था रवि क्या देखता है लिली जो है उसका चेहरा बहुत ही भयानक हो जाता है उसके दो दांत बड़े हो जाते हैं वह साथ वाले आदमी के गले के पद कंधे पर चुभा देती है । और देखते ही देखते वह आदमी पीला पड़ जाता है और नीचे गिर जाता है ।


लिली के दांत वापस नॉर्मल हो जाते हैं ।वि घबरा जाता है इतने में क्या देखता है लिली मुड़ कर उसे घूर के देख रही है ।

रवि तुरंत गाड़ी स्टार्ट करके वापस घर आ जाता है और बिस्तर पर बैठ जाता है ।10 मिनट बाद लिली भी आ जाती है । कहती कुछ नहीं और नहाने चली जाती है नाईट ड्रेस पहन के आ जाती है ।


रवि उससे पूछता है आज तो मुझे तुम्हें मुझे बताना ही पड़ेगा कौन हो तुम यह क्या करती रहती हो । लिली कहती है तुम मुझसे मत पूछो तुम मुझे खो दोगे।तो रवि बोला मुझे तुम्हे खोने का डर अब नहीं है ।तुम राक्षस हो क्या हो आखिर तुम क्यों परेशान करती हो । क्यों लोगों की जान के पीछे पड़ी रहती हो । तो लिली बताती है कि ,मेरी माँ वैंपायर थी और पिता इंसान थे फिर जब मेरा जन्म हुआ तो मुझमे पिता और माता दोनों के गुण आ गए दिन में तो मैं इंसान रहती हूं और रात को मैं वैंपायर बन जाती हूं ।वैंपायर वही जो लोगों का खून चूस के जिंदा रहता है ।मैं वैंपायर नहीं बनना चाहती थी मैं मनुष्य ही रहना चाहती थी ।पर यह मेरे बस में नही था ।फिर एक दिन फादर ने मुझे बताया कि किस तरह से मैं केवल मनुष्य बन सकती हूं और मुझे वैंपायर योनि से मुक्ति मिल सकती ।


उन्होंने कहा कि अगर मैं किसी मनुष्य से शादी कर लो और 1 वर्ष तक वह मुझसे कोई भी सबन्ध नही बनाएगा और कोई सवाल किए बिना रह लेगा तो मुझे इस योनि से मुक्ति मिल जाएगी और मैं पूरी तरह से मनुष्य बन जाऊंगी ।इसलिए मैंने कहा था कि तुम मुझे कुछ भी सवाल मत करना और तुमने ऐसा किया भी । पर अब तुमने मुझसे यह सब पूछ लिया तो मुझे बताना ही पड़ा । वह रोने लगती है अब मुझे कभी भी इससे मुक्ति नहीं मिलेगी मैं जीवन भर वैम्पायर ही बनी रहूंगी । अब तुम्हारे साथ भी कभी नहीं रह पाऊंगी । रवि मैं तुम्हें बहुत प्यार करने लगी थी । मगर अब मुझे जाना होगा हमेशा हमेशा के लिए जाना होगा ।यह करके लिली चली जाती है और रवि ठगा सा देखता रह जाता है।



अवंतिका Best Horror Stories In Hindi


  अनाया और साक्षी ‘शांति निकुंज’ गर्ल्स हॉस्टल में रहकर बी० ए० की पढ़ाई कर रहीं थीं। वो दोनों हॉस्टल के एक ही कमरे में रहा करती थीं। एक रात, वो दोनों हॉस्टल की मेस से खाना खाकर अपने कमरे को लौट रहीं थीं की तभी साक्षी की नज़र हॉस्टल के कमरा नंबर 104 पर पड़ी।

"ये कमरा कब से बंद पड़ा है ?" साक्षी ने कमरे के दरवाज़े पर लगे ताले को देखते हुए कहा। "यहाँ कोई रहने क्यों नहीं आता ?"

"ये कमरा वार्डन किसी को नहीं देंगीं।" अनाया ने तेज़ी से कदम बढ़ाये।

"भला ऐसा क्यों ?" साक्षी भी तेज़ी से चलकर अनाया के साथ हो ली।

"क्या तुम्हे नहीं पता, क्यों ?" अनाया ने अपने कमरे की लाइट ऑन की और पलंग पर जाकर बैठ गयी।

"नहीं तो," साक्षी ने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और अनाया के पास जाकर बैठ गयी।

"आज से पांच साल पहले, उस कमरे में अवंतिका नाम की एक लड़की रहती थी।" अनाया की आँखों में खौफ़ साफ़ नज़र आ रहा था। "एक रात, अचानक उसकी मौत हो गयी। उसकी मौत इतने रहस्यात्मक तरीके से हुई थी की सब दंग रह गए।"

"क्यों, ऐसा क्या हुआ था उसके साथ ?" जिज्ञासा के मारे साक्षी के रोंगटे खड़े हो गए थे।

"उसकी लाश, उसके कमरे से लगे वाशरूम के बाथटब में मिली थी। सबको यही लगता था की उसकी मौत पानी में डूबने की वजह से हुई थी। लेकिन पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट जब आयी तो पता चला, उसके फेफड़ों में तो एक बूँद पानी तक नहीं गया। उसकी मौत तो दम घुटने की वजह से हुई थी। मगर, उसके कमरे के सारी खिड़कियां और दरवाज़े अंदर से बंद थे। मतलब कोई बाहर से उसके कमरे में दाखिल नहीं हुआ। और, कमरे में वो अकेली रहती थी। पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट में ऐसी बात सामने नहीं आयी जो उसकी मौत की वजह पर रोशनी ड़ाल सके। किसी को समझ नहीं आया की आखिर उसके साथ क्या हुआ था।"

"फिर ?" साक्षी ने भौहें सिकोड़ ली, "पुलिस ने मामले की छान-बीन नहीं की क्या ?"

"पुलिस की तहकीकात की कहानी तो इससे भी अजीब है," कहते हुए अनाया के चेहरे का रंग उड़ने लगा। "आज तक, पुलिस के कईं अफसरों ने इस मामले की तफ्तीश की है। मगर कोई भी अवंतिका की रहस्यमयी मौत की गुत्थी को सुलझा नहीं पाया। पुलिस की तहकीकात अब भी जारी है।"

"क्या उनके हाथ भी कोई सबूत नहीं लगा ?" साक्षी ने बड़ी कौतुकता से अनाया के चेहरे का रंग बदलते देखा।

"जैसे ही ये सुनने में आता की पुलिस के किसी अफसर के हाथ कोई बड़ा सुराग लगा है या तो उसकी किसी दुर्घटना में मौत हो जाती या फिर केस की तहकीकात को बीच में ही छोड़ अपना तबादला कहीं दूर करवा लेते।"

"ये तो सच-मुच बड़ी विचित्र बात है।" साक्षी सोच में पड़ गयी। "लेकिन, ये तो बताओ, वार्डन ने वो कमरा क्यों बंद करवा दिया ?"

"कहते हैं, वो कमरा हॉन्टेड है।" अनाया धीरे से फुसफुसाई जैसे मानो कमरे में उन दोनों के अलावा कोई और भी हो, जो उनकी बातें सुन रहा हो। "उस कमरे में अवंतिका की आत्मा, अब भी मौजूद है।" 

"चल, झूठी !" साक्षी ठहाके मारकर हंसने लगी, "ये आत्मा - वात्मा कुछ नहीं होती। तुमने ही तो कहा न की पुलिस की तहकीकात अब भी चल रही है। इसी वजह से वार्डन ने वो रूम बंद करके रखा होगा ताकि उस कमरे में मौजूद सबूतों के साथ कोई छेड़े-खानी न करे।"

"अरे ! मैं सच कह रही हूँ, साक्षी।" अनाया ने साक्षी के हाथों को कसकर पकड़ लिया। "मेरी ममेरी बहन, वाणी दीदी, ऐसी परनोर्मल चीज़ों पर रिसर्च कर रही हैं। वो पिछली बार जब छुट्टियों में घर आयीं थीं तो उन्होंने मुझे ऐसी बहुत सारी घटनाओं के बारे में बताया था जो उनके रिसेर्च के दौरान सामने आयीं। ऐसे वाक़िया अजीब ज़रूर लगते हैं, मगर हैं बिलकुल सच। मैं तुझे एक चीज़ दिखती हूँ जो मैंने वाणी दीदी के बैग में से चुराई थी।"

"क्या ? तूने चोरी की," साक्षी चिल्लाई, "मगर क्यों ? तुझे शर्म नहीं आयी अपनी ही बहन की चीज़ें चुराते हुए ?"

"तो, तुझे क्या लगता है," अनाया ज़रा अकड़कर बोली, "मैं अगर शराफत से मांगती तो वो मुझे दे देती ?"

"ऐसा कौन सा कोहिनूर चुराया है तूने ?" साक्षी ने अनाया को अपने बैग में कुछ ढूंढ़ते हुए देखा।

"देखो, ये तो कोहिनूर से भी नायाब चीज़ है।" अनाया ने लकड़ी की बनी त्रिकोणाकार कोई चीज़ निकालकर उन दोनों के बीच पलंग पर रख दी।

"ये क्या है ?" साक्षी ने बड़ी कौतुकता से उसे देखा।

"इसे प्लेनचिट कहते हैं।" अनाया ने बड़े गर्व से साक्षी को ज्ञान दिया। "वाणी दीदी कहती हैं की इसके ज़रिये हम आत्माओं से बात कर सकते हैं।"

"फेंकू कहीं की !" साक्षी, अनाया का मज़ाक उड़ाकर हंसने लगी।

"शर्त लगाने को तैयार हो ?" अनाया ने चुनौती दी। "मैं ये बात साबित कर सकती हूँ।"

"कैसे ?"

"इस प्लेनचिट के ज़रिये अवंतिका की मौत का सच पता करके।"

"लेकिन, वो कैसे ?"

"देखो," अनाया साक्षी के बिलकुल करीब आकर बैठ गयी और धीरे से बोली, "हम अवंतिका के कमरे में जायेंगे और उसकी आत्मा को बुलाएँगे। इस प्लेनचिट के ज़रिये उसकी आत्मा से हैं बात करेंगे और ये पता लगाएंगे की उसकी मौत कैसे हुई थी ?"

"लेकिन वो कमरा तो हमेशा बंद रहता है और चाबी वार्डन के पास है।" साक्षी ने शक ज़ाहिर किया, "फिर हम उस कमरे के अंदर कैसे जायेंगे ?"

"तुम वार्डन को बातों में उलझाए रखना," अनाया ने प्लान बनाया, "मैं मौका देखकर वार्डन के ऑफिस में घुस जाऊँगी और साबुन पर उस कमरे की चाबी की छाप ले लूँगी। फिर अपने कॉलेज के पास जो चाबी बनाने वाले की दूकान हैं न, वहां से कल एक नयी चाबी बनवा लेंगे।"

"ये ठीक रहेगा।" साक्षी बड़े उत्साह से बोली।


अगली रात, अमावस की रात थी। रात के खाने के बाद, हॉस्टल में सब सो चुके थे। सारे कमरे की बत्तियां, हमेशा की तरह दस बजे के बाद बुझा दी गयी थी और पूरा हॉस्टल अँधेरे की चादर ओढ़े खड़ा था। करीब बारह बजे, अनाया और साक्षी उठे और कमरा नंबर 104 की तरफ चल दिए। चारों तरफ सन्नाटा था। कभी - कभी हॉस्टल के गेट के बाहर से कुत्तों के भौंकने की आवाज़, इस सन्नाटे को चीरते हुए आती थी। अनाया ने अपनी नयी चाबी से कमरे का ताला खोला और वो दोनों कमरे के अंदर आ गए। अनाया ने मेज़ पर एक मोमबत्ती जलाई और प्लेनचिट उसके पास रख दिया। प्लेनचिट के पास ही एक कागज़ भी रख दिया। फिर वो दोनों, वहीँ बैठ गयीं और मन - ही - मन, अवंतिका की आत्मा को पुकारने लगीं। तभी ज़ोरों से आंधी चलने लगी और मोमबत्ती बुझ गयीं। कमरे में रखी हर एक चीज़ कांपने लगी जैसे मानो भूकंप आया हो। अनाया और साक्षी डर गयीं और दोनों ने एक - दूसरे का हाथ कसकर पकड़ लिया। थोड़ी देर में सब शांत हो गया और आंधी -तूफ़ान भी बंद हो गया। तूफ़ान के शांत होते ही बुझी हुई मोमबत्ती खुद -ब - खुद जल उठी। उसकी रोशनी में अनाया ने देखा की प्लेनचिट के पास रखे कागज़ पर कुछ लिखा हुआ था। उसने साक्षी को वो कागज़ दिखाया और वो दोनों साथ मिलकर पढ़ने लगी। उस पर कुछ यूँ लिखा हुआ था -


"मेरा नाम अवंतिका है। मैं, बी० ए० फाइनल ईयर की स्टूडेंट हूँ। मुझे मेरी क्लास में पढ़ने वाले अमित नाम के लड़के से प्यार हो गया था। अमित भी मुझे बहुत प्यार करता था। पढ़ाई खत्म होते ही हम एक - दूसरे से शादी करना चाहते थे। वर्षा मेरी सबसे अच्छी सहेली थी। लेकिन, एक दिन मैंने उसे अमित से बहुत अजीब तरह से बर्ताव करते देखा। वो अमित के बहुत करीब आने की कोशिश कर रही थी। उसकी आँखों में अमित के लिए प्यार साफ़ नज़र आ रहा था। मुझे वर्षा की इस हरकत का बहुत बुरा लगा। लेकिन, अमित ने उसकी ये ग़लतफहमी दूर कर दी। हमने तीनों ने आपस में बात करके आपसी मन-मुटाव दूर कर लिया और फिर से एक-दूसरे के दोस्त बन गए। कम- से - कम, मुझे तो यही लग रहा था।


  एक रात, मैं सोने जा रही थी की हॉस्टल के मेरे कमरे की खिड़की पर किसी ने दस्तक दी। मैंने खिड़की खोली तो देखा की वर्षा मिठाईयों का डब्बा लिए, मेरे कमरे की खिड़की के बाहर खड़ी है। उसने बताया की उसकी शादी तय हो गयी है और उसने मुझे मिट्ठाई खिलाई। वो ये खुशखबरी मुझे सुनाने के लिए बेक़रार थी इसलिए रात को ही पीछे के रास्ते से हॉस्टल आ गयी। मैंने उसे अंदर आने को कहा तो उसने मना कर दिया। वो बोली की रात बहुत हो गयी है और उसे वापस घर जाना है। उसके जाने के बाद, मैंने खिड़की बंद कर दी। मैं वर्षा की शादी की बात को लेकर बहुत खुश थी और उसके लिए एक अच्छे और सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करते हुए मैंने उसकी दी मिठाई खा ली। लेकिन, वो मिठाई खाते ही मेरा दम घुटने लगा और मेरी मौत हो गयी। वर्षा ने उस मिठाई में ज़हर मिलाया था। वो मुझे अपने रास्ते से हटाकर अमित को पाना चाहती थी। उसकी शादी की बात भी झूठ थी। मेरी मौत के बाद उसने अमित से सहानुभूति दिखाकर उसे अपने प्यार के जाल में फाँस लिया है। उसकी बहुत जल्द अमित से शादी होने वाली है। लेकिन, ऐसा नहीं होना चाहिए। उसने मेरे साथ विश्वासघात किया हैं और उसे इसकी सजा ज़रूर मिलनी चाहिए।"


"हाँ, अवंतिका," वो काग़ज़ हाथ में लिए अनाया बोली, "तुम्हे न्याय ज़रूर मिलना चाहिए।"

"अगर हम ये काग़ज़ पुलिस को दिखा दे तो वो वर्षा को गिरफ्तार कर लेंगे, हैं न ?" साक्षी ने कहा।

"नहीं, साक्षी," अनाया परेशान थी, “पुलिस ऐसे सबूतों को नहीं मानती। उनको यही लगेगा की हम दोनों ने मिलकर कोई मनगढंत कहानी लिख दी है।"

"तो अब हम क्या करेंगे ?" साक्षी ने पूछा।

"मुझे वर्षा से मिलना होगा।"



  जब से हॉस्टल की दो लड़कियों ने वर्षा को फ़ोन कर अवंतिका की मौत के बारे बताया था, तब से वर्षा थोड़ी परेशान थी। लेकिन, फिर भी, उसे ये विश्वास था की जैसे उसने आज तक हर अड़चन को अपने रास्ते से हटाया है, उसी तरह इन दो लड़कियों को भी ठिकाने लगा देगी। उसने उन्हें मिलने के लिए अपने फार्महाउस बुलाया था। वर्षा ने अपनी घडी देखी।


"अब तक तो उन लड़कियों को आ जाना चाहिए था।" वर्षा खुद से बोली और फिर चहल - कदमी करने लगी।


तभी दरवाज़े की घंटी बजी और वर्षा ने जल्दी से दरवाज़ा खोल दिया।


"अपना जुर्म कुबूल कर, खुद को कानून के हवाले कर दो, वर्षा," अनाया ने वर्षा से कहा, "वार्ना तुम्हे बहुत दर्दनाक सज़ा मिलेगी।"


"अरे जा, जा !" वर्षा बड़े घमंड से बोली, "आज तक कोई पता कर पाया है की अवंतिका की मौत कैसे हुई। फिर तुम क्या बिगाड़ लोगे मेरा ? मैंने कोई सबूत ही नहीं छोड़ा। मैंने उसे ऐसा ज़हर दिया था जो कुछ ही घंटों में खून से गायब हो जाता है। इसीलिए, तो पोस्टमॉर्टेम में पकड़ा नहीं गया। अवंतिका की मौत की तहकीकात कर रहे, जिस पुलिस अफसर ने भी मेरा राज़ जानने की कोशिश की, उसे मैंने या तो डरा - धमकाकर या रिश्वत देकर अपने रास्ते से हटा लिया। और जो सच सामने लाने की ज़िद्द पर अड़े थे, उन्हें मैंने मार डाला। अब तुम्हारा भी यही हाल होगा।" कहकर वर्षा ने अपनी बैग में से पिस्तौल निकाल ली।


वो लड़कियों पर गोली चलाने ही वाली थी की ज़ोर से आँधी चलने लगी। हवा के साथ धूल - मिट्ठी भी उड़कर अंदर आ गयी। वर्षा का दम घुटने लगा। वो ज़ोर - ज़ोर से खांसने लगी।

"खिड़कियां बंद कर दो," वर्षा ने किसी तरह अनाया से कहा, "मुझे धूल से एलर्जी है। मेरा दम घुटने लगता है।"


  अनाया ने खिड़कियां बंद करने की कोशिश की मगर हवा इतनी तेज़ थी की साक्षी और अनाया दोनों मिलकर भी खड़िकियाँ बंद नहीं पाए। फिर भी वो दोनों कोशिश करते रहे। थोड़ी देर बाद, आंधी रुक गयी और दोनों ने मिलकर खिड़कियां बंद कर दी। फिर उन्होंने मुड़कर जब वर्षा को देखा तो उनके होश उड़ गए। वर्षा फर्श पर पड़ी हुई थी। दम घुटने की वजह से उसकी मौत हो गयी थी ठीक उसी तरह से, जैसे आज से पांच साल पहले उसने अवंतिका की हत्या की थी।



भयानक चेहरा Best Horror Stories In Hindi


 ठक-ठक -ठक -शोर्मा जी ! ओ शोर्मा जी !! ठक-ठक-ठक-ठक !! ओ शोर्मा जी- ओ शोर्मा बाबू मोशाय—

लगातार कुण्डा खड़कने तथा पुकारे जाने पर पहले श्रीमती शर्मा जागीं, फिर शर्मा की निद्रा टूटी। उन्हें कोटाल बाबू की आवाज पहचानने में कोई भूल नहीं हुई। उस समय घड़ी पौने दो बजे का समय बता रही थी। 

कोटाल अवश्य किसी बड़ी मुसीबत में है। अन्यथा इतनी रात को उन्हें न जगाता -- शर्मा जी तत्काल चैतन्य हुए। 


क्या हुआ होगा -लीला ने पूछा ?

क्या पता ? कोई गड़बड़ जरूर है, वरना बंगाली भाई इतनी रात को नहीं आता। 

मिसेज शर्मा ने सहमति में सिर हिलाया। 

शर्मा जी ने दरवाजा खोला। 

सामने परिमल कोटाल खड़ा था। उसके चेहरे पर हवाईयां उड़ रही थी। शुरुआती मार्च की खुशनुमा रात में भी उनका बदन पसीने से तरबतर था।  

कोटाल ने शीघ्रता से शर्मा का हाथ थामा, मानो उसे सहारे की आवश्यकता हो। 

भगवान का शुक्र है बाबू मोशाय - जो आप जल्दी जाग गये !

क्या हुआ कोटाल जी-

भूत बाबू मोशाय भूत बहुत सारे !

अच्छा ! कहाँ हैं भूत ?--शर्मा जी ने आश्चर्य से कहा ! वे भूत-प्रेतों पर विश्वास नहीं करते थे। 

वो मेरे शोरोबी पड़ोसी के घर में। 

गोपंती बाबू के यहाँ !- क्या कर रहे हैं भूत लोग – शर्मा जी भूतों के जिक्र से खुश हो गये। 

पोर्टी कोर रहे हैं बाबू मोशाय -आप चोल के देखो तो सही। 

ठीक है -अभी चोल के देखते हैं आपके भूत को –दो मिनट ठहरिये !

जोल्दी करो शोर्मा जी -बच्चे डोर रहे होयेंगे। 

अभी कोटाल भाई ! 


शर्मा जी सचमुच में दो मिनट में कोटाल बाबू के साथ रवाना हो गये। आसमान में कृष्ण पक्ष के दूज का चाँद मुस्कराता हुआ अपनी चाँदनी बिखेर रहा था,फिर भी शर्मा जी के हाथ में टार्च थी, वक्त-जरुरत के लिये !

चंद्रिका प्रसाद शर्मा भूत-प्रेतों को मन का वहम मानते थे, भूत-प्रेत पर विश्वास करने वालों को उनका खुला चैलेंज था कि भूत दिखाओ और हजार रुपये नकद इनाम पाओ ! 

वे सिंचाई विभाग में क्लर्क थे तथा रामपुर कालोनी के सरकारी क्वार्टर में सपत्नीक रहते थे। उनके सामने वाली लाइन में पांचवीं ब्लाक के पहले क्वार्टर में परिमल कोटाल तथा उनके बाजू में त्रिलोक दास गोपंती रहते थे। गोपंती बाबू का मकान कालोनी का आखिरी मकान था, उसके बाद जंगल-झाड़ियाँ शुरु हो जाती थी। 


त्रिलोक दास गोपंती खालिस छत्तीसगढिय़ा आदमी थे जबकि परिमल कोटाल बंगाली मानुष थे। शर्मा जी की कोटाल महाशय से ठीक ठाक मैत्री संबंध था जबकि त्रिलोक दास से मामूली दुआ सलाम थी, इसकी बड़ी वजह गोपंती बाबू का कदाचरण था।  

कोटाल परिवार का मोहल्ले में किसी से भी अधिक घनिष्ठता नहीं थी, वे लोग अपनी ही दिनचर्या में ही मगन रहते थे। 

होलिका दहन की रात्रि में उनके पड़ोस में गोपंती बाबू के घर काफी हंगामा व शोरगुल हुआ था। त्रिलोक दास तथा उनके शराबी मित्रों ने खूब हुड़दंग किया था। इसकी वजह से कोटाल परिवार रात भर सो नहीं पाया था। 

परिमल कोटाल ने तब चैन की सांस ली जब होलिकोत्सव वाला पूरा दिन उनका पड़ोस शांत रहा। 


त्रिलोक दास गोपंती का रहन-सहन साधारण नहीं था। वे पक्के शराबी तथा व्याभिचारी मनुष्य थे। उम्र ५८-५९ की हो चुकी थी रिटायरमेंट करीब था, फिर भी उनका दिल जवान था।  

रामपुर के तमाम वाहियात तथा चरित्र हीन स्त्री-पुरुषों से उनका मेलजोल था। अलबत्ता उनकी धर्मपत्नी प्रभावती साध्वी महिला थी, जो यथासंभव व्रत-उपवास, भजन-पूजन, कथा-कीर्तन करती थी। 

उनकी दो संतानें थी, एक लड़की आरती जिसका ब्याह हो चुका था, तथा उससे छोटा पुत्र अनिल, जो ट्रक ड्राइवर था। वह अपने पिता के आचरण तथा चाल-ढाल से त्रस्त था। इसलिए वह रामपुर में ही किराये का मकान लेकर अलग रहता था। प्रभावती प्रायः अपने पुत्र अनिल के साथ रहती थी, त्रिलोक दास को इसमें कोई आपत्ति नहीं थी। इससे उसे बेरोक-टोक ऐश करने की आजादी मिलती थी। 


होली की वजह से कालोनी के ज्यादातर कर्मचारी अपने-अपने घरों (गाँव-शहरों) को जा चुके थे। इक्का-दुक्का परिवार ही कालोनी में रुका हुआ था। 

कोटाल परिवार घर में दुबका हुआ था। इन्हें देखकर भी उनका बाहर आने का साहस न हुआ। अधखुली खिड़की में श्रीमती वैजयंती कोटाल का भयभीत चेहरा एक क्षण को दिखाई दिया, फिर तत्काल गायब हो गया।  

सुनो शोर्मा जी –परिमल धीरे से फुसफुसाया- बोजा बोजा के भूत लोग डाँस कर रहे हैं। 

अच्छा – शर्मा जी के माथे पर पसीना चुहचुहा आया। भूत दिखाओ कहना जितना आसान होता है, भूत की काल्पनिक उपस्थिति भी उतनी ही भयभीत करने वाली होती है। यह शर्मा जी की मुखमुद्रा से स्पष्ट थी। 

वातावरण में अजीब सा गंध फैला था, जिसे बर्दाश्त करना शर्मा जी को मुश्किल प्रतीत हुआ। उन्होंने तक्षण नाक पर गमछा लपेट लिया।   

कहीं चूहा मरा होगा शोर्मा जी। 

शर्मा जी ने सहमति में अपना सिर हिलाया। 

गोपंती बाबू का मकान अंधेरे में डूबा हुआ था, उसकी दो खिड़कियों में से एक थोड़ी खुली हुई थी। इसके बावजूद बिना पास गये भीतर क्या हो रहा है यह देख पाना संभव नहीं था। उनके तथा खिड़की के बीच काँटेदार तारों की फेंसिंग थी, खिड़की तक पहुँचने के लिए उन्हें लोहे का गेट ठेलकर भीतर जाना पड़ता। 

दूर होने पर भी भीतर चल रही रहस्यमय संगीत की आवाज सड़क से सुनाई दे रही थी, हालांकि यह आवाज बहुत क्षीण थी। यदि परिमल कोटाल ने उन्हें पहले से न बताया होता तब शायद ही उनका ध्यान इस ओर जाता। भीतर कमरे में न होने जैसी हलचल उन्हें महसूस हुई। 

भीतर शायद एक से अधिक लोग थे, रात के सन्नाटे में फुसफुसाहट भरी आवाजों को सुनकर शर्मा जी असमंजस में पड़ गये। 


परिमल कोटाल शर्मा जी के पीछे दुबक चुके थे और आजू-बाजू से झांकते हुए हनुमान जी को याद करने लगे- बोचा लो- हनुमान जी बोचा लो, ! ये भूत लोग बहोत डरा रहा हैं बोचा लो प्रोभु जी, हम ओपके शोरण में हैं। 

शर्मा जी ने उनके हाथ को दबाकर चुप रहने का इशारा किया। उन्हें कमरे में हलचल तेज होने का आभास हुआ फुसफुसाहटों का शोर एकाएक तेज हुआ हालांकि उसका एक भी शब्द परिमल कोटाल तथा चंद्रिका प्रसाद शर्मा के पल्ले नहीं पड़ा।  

परिमल कुछ कहने को हुआ। शर्मा जी ने उन्हें चुप रहने का इशारा किया। खिड़की के उस तरफ कोई था, जो उन्हें ही घूर रहा था। शर्मा जी के रोंगटे खड़े हो गये। एकाएक उनके पैर काँपने लगे और गला भी सूख गया। पूरा बदन पसीने से नहा उठा।  शर्मा जी ने इसे वातावरण का प्रभाव समझा। 


शर्मा जी ने भीतर जाकर देखने का निश्चय किया। कोटाल ने उन्हें रोकने का बहुत प्रयास किया किन्तु वे न ही रुके। सड़क से नीचे उतर वे लोहे के गेट के सामने जा खड़े हुए। कोटाल डर के मारे थर-थर-थर-थर काँपने लगा। 

मत जाओ शोर्मा बाबू मोशाय – कोटाल ने उन्हें रोकने का एक बार और प्रयास किया।  

कुछ नहीं होगा बंगाली भाई ! आप चुपचाप देखते जाओ- कहते हुए शर्मा जी जैसे ही लोहे का गेट खोलने को हुए उन्हें जोर का झटका लगा। मानो गेट में बिजली का करंट दौड़ रहा हो !

तभी कोटाल चीख उठा - बाबू मोशाय उधर !

उसने अधखुली खिड़की की ओर इशारा किया।  


शर्मा जी को सहसा विश्वास न हुआ। खिड़की से एक वीभत्स चेहरा उन्हें ही घूर रहा था, जिसके आधे चेहरे का माँस गायब था, उसकी आँखें लाल तथा क्रोध से भरी हुई थी। वह भयानक चेहरा गोपंती बाबू का था। 

शर्मा जी की घिग्गी बँध गयी। उन्हें अपना सिर घूमता हुआ प्रतीत हुआ। उनकी सारी दिलेरी पल भर में हवा हो गयी। गोपंती बाबू का भयानक चेहरा कोटाल बाबू ने भी देखा। उन्होंने शर्मा जी को कसकर पकड़ लिया।  

उनके देखते ही देखते गोपंती बाबू का भयानक चेहरा खिड़की से गायब हो गया इसके साथ ही खिड़की बंद हो गयी। 

बाकी की बची हुई रात कोटाल परिवार ने शर्मा जी के मकान में बिताई। कोटाल बाबू के बच्चों को भी नींद नहीं आई।  

चंद्रिका प्रसाद शर्मा ने जो कुछ देखा तथा अनुभव किया उससे वे अवाक थे। यदि वह सच था तो ऐसा कैसे हो सकता है और यदि वह भ्रम था तो एक साथ दो लोगों को कैसे हो सकता है ?


कोटाल परिवार अब किसी भी कीमत पर उस मकान में रहना नहीं चाहता था। मिसेज़ शर्मा भी मकान बदलने के पक्ष में थी।  

उस दिन सूर्य देवता दोनों परिवारों के लिए आश्चर्य लेकर उदित हुए थे। इससे पहले की शर्मा जी गोपंती बाबू के लड़के अनिल की तलाश में जाते, अनिल अपने पिता की खोज खबर लेने स्वयं ही आ गया।  

होली तथा भाई दूज दो-दो त्यौहार निकल गया और गोपंती बाबू अपनी पत्नी तथा पुत्र से मिलने नहीं गये तब जाकर उसे फिक्र हुई थी। 

उसने अपने पिता को आवाज दिया। कुण्डी खटखटाई, खिड़कियों को ठोंका, दरवाजे को पीटा, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। भीतर से इनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। तब तक वहां तमाशाइयों का अच्छा-खासा हुजूम इकट्ठा हो चुका था।  


दरवाजा न खुलने पर अनहोनी की आशंका हुई । कोटाल बाबू तथा शर्मा जी भी भीड़ में शामिल थे तथा तमाशा देख रहे थे। उन्होंने रात को जो देखा तथा अनुभव किया उसे अनिल या किसी और से कहना उन्हें मुनासिब नहीं लगा। 

मकान के आसपास रात के मुकाबले बदबू तेज थी। अब तक अनिल को भी किसी अनिष्ट की आशंका हो चुकी थी। किसी ने उसे सलाह दिया कि शायद भीतर आंगन तरफ का दरवाजा कहीं खुला हो ! 

नाक और मुख पर रुमाल बांधकर अनिल तथा एक और लड़का दीवार फांदकर भीतर गये। उधर का भी दरवाजा तथा खिड़की भीतर से बंद थी।  सभी खिड़की-दरवाजों का भीतर से बंद होना तथा वातावरण में फैली तेज दुर्गंध ने सभी को विश्वास करने पर मजबूर कर दिया कि गोपंती बाबू के साथ कोई अनिष्ट हो चुका है। 


दरवाजा तोड़ने पर भीतर से गोपंती बाबू की दो दिन पुरानी लाश बरामद हुई। उनका आधा शरीर बिस्तर पर तथा आधा भूमि पर था, हाथ के करीब ही काँच का गिलास लुढ़का हुआ था। 

सिरहाने की ओर स्टूल पर आधी प्लेट नमकीन तथा देशी शराब का आधा भरा हुआ अद्धा रखा था। उनकी मौत की वजह प्यास या फिर अधिक मदिरापान था। 

गोपंती बाबू की लाश की इस तरह बरामदगी ने कोटाल तथा शर्मा परिवार को हिलाकर रख दिया। यदि वे दो दिन पहले मर चूके थे, तो रात में उन्हें किसने घूरा था। भीतर से बंद खिड़की क्यों कर खुली और दोबारा बंद कैसे हुई ? उसे किसने खोला और बंद किया।  

दहकते लाल सुर्ख आँखों वाला भयानक चेहरा क्या सचमुच गोपंती बाबू का था या परिमल और उन्हें दृष्टि भ्रम हुआ था या फिर उन्होंने सच में गोपंती बाबू के भूत को देखा था। यदि हाँ तो यह कैसे संभव है ?


उपरोक्त प्रश्नों का उत्तर न तो कोटाल बाबू के पास था और न ही शर्मा बाबू के पास। दिवंगत आत्मा के प्रति सम्मान रखते हुए दोनों ने इस मामले में खामोश रहना ही उचित समझा।  

कोटाल परिवार का मकान गोपंती बाबू के मकान से लगा हुआ था, इस कारण उनका मकान बदलना समझदारी भरा निर्णय था किन्तु पाँच ब्लाक दूर होने पर भी शर्मा जी ने पहला मौका मिलते ही मकान बदल लिया। उन्हें जिस तरह का अलौकिक अनुभव हुआ था, उसे देखते हुए यह निर्णय उचित ही था। 


इसके बाद गोपंती बाबू वाला क्वार्टर जिस कर्मचारी को अलाट हुआ, उसे विचित्र तथा डरावना अहसास हुआ इससे भयभीत होकर उसने कुछ ही दिनों में क्वार्टर बदल दिया। इसके बाद वहाँ रहने आये दो-तीन परिवारों को भी वहाँ कुछ अटपटा (भूतिहा) अनुभव हुआ। 

 इसके साथ ही वह ‘भुतहा मकान’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया था। फिर किसी की हिम्मत नहीं हुई वहाँ रहने की।



पुराना कब्रिस्तान Best Horror Stories In Hindi


रोजी दुखी तो थी ही ,पर बहुत परेशान भी हो रही थी , रॉबर्ट की डेथ हो गयी है मगर , और उनका ग्रेवियार्ड भी बहुत दूर है । और इस लॉक डाउन और कोरोना के चक्कर मे वह वहां तक जा भी नही पा रहे है ।कोई सगा सम्बन्धी भी नही आ पाया , सरकार ने तो बीस लोगो को तो अलावउ किया है , पर मुश्किल से आस पड़ोस के ही आठ दस लोग ही आ पाये है , जो उनके फैमिली फ्रेंड थे ।टोनी , माइकल, जॉर्ज , जोजफ , मैरी , जॉन ,सिल्विया , लिली , और फादर कौपीन का इंतजाम तो हो गया , टोनी ने उसे मंगवा लिया था।पर कोई साधन नही था जिससे कब्रिस्तान तक पहुचा जाए ।तो उन्होंने सोचा पास में जो कब्रिस्तान है उसी में ले जाया जाय ।पर फादर ने मना कर दिया ।तो टोनी और माइकल कहते है , फादर आखिर क्या रहस्य है उस कब्रिस्तान का , हम भी बचपन से देखते आये है वहाँ जाना मना है कोई भी वहां नही आता जाता । आखिर क्या कारण है ।


फादर ने कहा की वह कब्रिस्तान भूतिया है , वहां पर जिसे भी दफनाया जाता है ,उसकी सोल को कभी भी शांति नही मिलती है ।उस कब्रिस्तान को इसीलिये बंद किया गया था , करीब 100 साल पहले वहां की आत्माओं ने बहुत तबाही मचायी थी ।तो सभी कब्रो पर होली वाटर डालकर , उसके गेट पर लॉक लगाकर उसे भी क्रूस के साथ अभिमंत्रित करके बांध दिया था। जिससे की वह बाहर नही निकल सके ।


रोजी कहती है पर फादर हम कब तक रॉबर्ट को ऐसे रखेंगा । कुछ तो करना ही पड़ेगा ।हमने पुलिस को भी फोन लगाया था तो वो भी यही बोला जब तुम्हारे एरिया में कब्रिस्तान है तो दूर क्यो जा रहे हो । हम कोई साधन नही भेजेगा ।अब  आप ही बताइए फादर अब हम क्या करे ।


"डॉटर बलेस्ड यु पर मैं इसमें तुम्हारी कोई मदद नही कर सकता ।"


माइकल और टोनी बोला , "फादर रॉबर्ट को तो सोचो , वह कब तक ऐसा रहेगा ।"


तो फादर कुछ सोचते है और कहते है ठीक है , पर मैं जो कहूंगा वही करना अपनी मर्जी से कुछ नही करना ।


सब एक साथ कहते है "जी फादर "।रोजी रोने लगे जाती है ।


रोजी , और रॉबर्ट शहर में एक बस्ती में रहते थे , रॉबर्ट एक दुकान में काम करता था और रोजी घर से ही सिलाई का काम करती थी दोनो की गृहस्थी अच्छी चल रही थी , दोनो की शादी को दस साल हो गये थे पर उनका कोई बच्चा नही था ।फिर भी दोनो खुश थे । अपनी लाइफ को मस्ती में जीते थे । रॉबर्ट मिलनसार था सबसे उसकी दोस्ती थी । पर उसे शराब पीने की बुरी आदत थी , इसी एक वजह से उसका रोजी से झगड़ा भी।

होता रहता था ।रॉबर्ट को शराब की आदत तो थी ,पर अब वो उसकी जरूरत बन गयी थी ।अब जबसे लॉक डाउन लगा दोनो का काम छूट गया था पर उनकी बचत इतनी थी कि आसानी से काम चल रहा था ।पर रॉबर्ट परेशान, उसे शराब नही मिल रही थी । कुछ दिन तो घर मे रखी थी उससे कम चला लिया फिर , खत्म हो गयी तो बैचेनी होने लगी ।और एक दिन पड़ोसी ने बताया की कोई बेच रहा है । तो रॉबर्ट वहां से दुगने दामों में ले आया । पर वह जहरीली थी । और उसने रॉबर्ट की जान ही ले ली ।   रोजी ने खबर करी तो सब आस पास के दोस्त आ गये थे ।अब , सब लोग कौपीन को , कब्रिस्तान में ले गये , फादर ने सबको एक एक क्रॉस दिया की इसे सब गले मे डाल लो । 

तो टोनी कहता है फादर मेरे पास तो है , 


तो फादर कहते है "मैं जानता हूँ माय सन ,यह सबने ही पहना होगा पर यह दूसरी चीज है ।और चुपचाप पहन लो और मैं जो कहूँ वही करना , बिल्कुल भी सवाल , मत करना । बहस मत करना ।"


"जी फादर ।" सब कहते है 


 वे लोग कब्रिस्तान पहुंच गये बहुत ही डरावना लग रहा था । मगर सब कुछ शांत लग , रहा था ।फादर ने गेट पर कुछ डाला , और कुछ बुदबुदाया , तो सबने देखा कि गेट पर लगा ताला अपने आप खुल गया ।पर जैसे ही गेट खुला तेज हवाएं चलने लगी , इतनी की व्यक्ति हिल जाये । वो लोग बड़ी मुश्किल से सम्भले , फिर कौपीन को अंदर ले गये , फादर ने गेट खुला रहने दिया , और वहां पर कुछ बुदबुदाते हुये , होली वाटर की एक लाइन खिंच दी ।

कब्रिस्तान बहुत बड़ा था करीब एक किलोमीटर अंदर जाने के बाद उन्हें ग्रेव नजर आने लगी , उन लोगो ने देखा वहां पर जितनी ग्रेव थी वो सब डेमेज थी , किसी पर भी नाम स्पस्ट नजर नही आ रहा था । और अधिकतर तो मिट्टी बन चुकी थी ।फादर ने एक जगह बता दी , जेंट्स लोग गड्डा खोदने लग गये , 

और लेडिस लोग कौपीन के पास बैठकर , रॉबर्ट की सोल के लिये प्रेयर कर रही थी ।गड्डा खुद चुका था ,वो लोग कौपीन को उसमे उतारने लगे , तभी क्या होता है , एक दम से कौपीन का ढक्कन खुल जाता है । और रॉबर्ट बाहर निकलने लगता है ।तो फादर चिल्लाते है चलो सब बाहर चलो, छोड़ दो इसे , सब बाहर निकलो और कोई भी मुड़कर नही देखना चाहे कुछ भी हो जाये । किसी की भी आवाज सुनायी दे, मत सुनना ।


सभी लोग भागने लगते है , तो रॉबर्ट की आवाज रोजी को सुनाई देती है , 


"रोजी डार्लिंग कहाँ जारही हो मुझे छोड़कर , मत जाओ इधर आओ, में चल नही पा रहा हूँ, मैं रॉबर्ट हूँ ,तुम्हारा हसबेंड आ जाओ, "


रोजी पीछे मुड़कर चली जाती है , रॉबर्ट के पास पहुचती है तो वह कहता है अरे रोजी यह गले का क्रॉस उत्तर दो ,दो क्यो पहने हो ।तो रोजी यंत्रवत उतार देती ही ,फिर रॉबर्ट उसको किस करता है , उसका मुँह बहुत बड़ा हो जाता हो जाता है , और वह रोजी का मुंह गर्दन तक भरकर खा जाता है।पल भर में ही रोजी का काम खत्म,


फिर रॉबर्ट जॉन ,और टोनी के पास पहुचता है ,और कहता है अरे फ्रेंड लोग तुम क्यो भाग रहा है , ये अपुन है , तुम्हारा फ्रेंड । अपुन जिंदा है , फिर से मस्ती करेंगा और दारू पियेगा ।तो दोनो रुक जाते है । फिर रॉबर्ट बहुत सारी दारू उनको दिखाता है और कहता है । देखो मेरे पास कितनी है तुम ये क्रॉस उतारो और चलो , अपन पेड़ के नीचे बैठ कर पियेंगे , दोनो उतराते ही वैसे ही , रॉबर्ट सारी बॉटल्स उनके सिर पर फोड़ देता है , दोनो ब्लड से नहा लेते है , और वही खत्म ,


जॉर्ज और सिल्विया दोनो लवर थे और , हाथ पकड़कर भाग रहे थे । उनके पास रॉबर्ट पहुंच जाता है , और कहता है सिल्विया जॉर्ज तुमको धोखा दे रहा है वह मेरी से सम्बन्ध रखता है है और तुमसे लव का दावा करता है ।सिल्विया रुक जाती है , जॉर्ज आगे निकल जाता है , फिर वह अपने हाथ मे सिल्विया का हाथ नही देखकर पीछे मुड़ता है , तो जो देखता है उसकी रूह कांप जाती है । सिल्विया के शरीर के पचास टुकड़े पड़े होंगे , वह उनके पास आता है और जोर जोर से रोने लगता है , तो रॉबर्ट रोजी की आवाज में कहता है , जॉर्ज यह सब इस क्रॉस की वजह से हुआ है उतार फेको इसे ।तो जॉर्ज उसे फेक देता है ,


फिर रॉबर्ट उसके पेट मे घुसा मारता है वह इतनी जोर से होता है की, जॉर्ज की आन्तड़िया मुँह से बाहर निकल आती है ।बाकी के लोग गेट तक पहुंच जाते है । मगर देखते क्या है , गेट तो बन्द है ।

फादर भी घबरा जाते है फिर कहते है , फिर थोड़ा सयंत होकर कहते है , माय चिल्ड्रन ,मैं चैनटिंग करता हूँ तुम भी जीजस को याद करो , और किसी की भी हालत में किसी की भी आवाज आये कुछ मत करना ।पर बाकी के लोग कहाँ है , लिली पूछती है तो ,फादर कहता है वह गॉड के पास गये , अब तुम अपना ध्यान रखो ,सब डर जाते है ।


पर माइकल कहता है ऐसे कैसे , चले गये, और वह मुड़ कर देखता है , और कहता है वह तो खड़े है ।


फादर सबको कहते है मुड़ना मत तो सब बात मान जाते है , 


माइकल कहता है देखो रॉबर्ट भी खड़ा है वह जिंदा है , फिर एकदम से सोचके वह सहम जाता , उसे समझ आ जाता है यह सब भूत है , वह कुछ बोलना चाहता है पर मुँह से आवाज नही निकलती । और उसके हाथ अपने आप गले की और जाते है और क्रॉस को निकालकर फेक देते है । फिर रॉबर्ट इतने प्रेशर से उसके सर पर वार करता है की वह जमीन में धंस जाता है , और खत्म ।मैरी को माइकल आवाजे आने लगती है , मुझे बचालो मैरी, मैं मर जाउंगी । मैरी रोने लगती है पर मुड़ती नही है वह लगतार गॉड से प्रेयर कर रही थी ।जोजफ को टोनी की आवाज सुनायी देती , वह कहता है यार में गड्ढे में गिर गया हूँ निकल नही पा रहा हूं , मेरी मदद कर दे यर ,जोजफ नही मुड़ता है । 


तो वह कहता है मैने तेरी कितनी मदद करी है , तू मुझे निकाल दे तो मैं बच जाऊंगा , नही तो रॉबर्ट मुझे भी मार देगा ।


आखिर जोजफ मुड़ ही जाता है , फिर वह गड्ढे के पास जाता है , उसका क्रॉस अपने आप टूट जाता है । वह गड्ढे में झांककर देखता है , तो एकदम से दो हाथ बाहर आते है और उसे खिंचकर अंदर ले जाते है । और फिर जमीन समतल हो जाती है ।


इधर फादर प्रेयर कर रहे थे तो दरवाजा खुल जाता है , मैरी लिली और फादर बाहर निकल आते है ।बाहर आकर फादर फिर से उस दरवाजे पर लॉक लगाकर क्रॉस लगा देते है । और होली वाटर डाल देते है ।लिली और मैरी के मुँह पर अभी भी डर का साया था ।


फादर कहते है "ये अब बाहर नही आ पाएंगे ।" और वे चर्च की और चले जाते है ।



घूँघट वाली लड़की Best Horror Stories In Hindi


किसी रिसर्च के सिलसिले में रोहन रामपुर नांमक गाँव में आया था। गाँव बहुत पुराना था।वहां ठहरने के लिए कोई होटल तो थी नहीं। और ना ही कोई गाँव वाला किसी अंजान व्यक्ति को अपने घर में रहने देता।काफी देर इदर-उदर भटकने के बाद रोहन को एक लड़की आती हुइ नज़र आई।उसने चेहरे पर लम्बा घूंघट निकाला हुआ था।रोहन ने उसे रोक कर पुछा..

रोहन:"इस गाँव में किसी अंजान मुसाफिर को रूकने की कोई जगह मिलेगी??"

लड़की कोई जवाब नहीं देती हैं थोड़ी दूर जा कर एक गेस्ट हाउस की तरफ इसारा करती हैं । रोहन गेस्ट हाउस देख कर बहुत खुश हो जाता है। जैसे ही उस लड़की को थैंक्यू कहने के लिए पीछे मुडता है,तो वो लड़की वहा से जा चुकी होती है उसे थोडा अजीब लगता हैं,पर रहने की जगह मिल जाने की खूशी में वह सब़ पर ध्यान नहीं देता।वह गेस्टहॉउस की तरफ बढता हैं देखने में ऐसा लगरहा था जैसे किसी पुरानी हवेली को गेस्ट हाउस में बदल दिया गया हो। रोहन हवेली में पहुचता हैं रिसेप्सन पर कोई नज़र नहीं आता हैं

रोहन:-"हैलो.....कोई हैं यहा ???.."

तभी अंदर से लम्बा-सा दिखनेवाला एक आदमी बाहर आता है सिर पर पगड़ी बंधी थी, चहरे पर दाड़ी-मूछ थी दिखने में अकडू लग रहा था ।भारी आवज में बोलता है:-"मेरा नाम बहादुर है, मैं ही यहा की देख-भाल करता हुँ तुम्हें क्या चाहिए ?"

रोहन :- "कोई रूम मिलेगा ??"

बहादुर: - "हॉ, मिल जाएगा।"एक चाबी उस के हाथ में थमा कर कहता हैं "सीढियां चढ़ते ही पहला कमरा है,"

रोहन धन्यवाद कहते हुए कहता हैं, "कुछ खाने के लिए मिलेगा...?"

बहादुर:- "तुम चलो मैं भीजवाता हूँ।"

रोहन चाबी लेकर रूम में पहुच जाता है, रूम काफी बड़ा और पुराने तरी के से सजा हुआ था। उस की तीनों दीवारें सजी थी पर एक दिवार बिल्कुल खाली थी । अजीब सा खीचाव महसूस कर रहा था, वह धीरे-धीरे दिवार की तरफ बढ़ता है,तभी पीछे से किसी के चलने की आवाज़ आती हैं, रोहन मुडकर देखता है, तो सामने वही घूंघटवाली लड़की हाथ में ट्रेे लिये खड़ी थी।

"रोहन आगे बढ़ कर "तुम वही होना जो बाहर मिली थी।"वह औरत ट्रे को टेबल पर रख कर बीना कुछ जवाब दिये चली जाती है!

अगले दिन रोहन जल्दी उठ कर रिसर्च के लिये गाँव के बाहर स्थित पुराने मन्दिर की तरफ जाता है रोहन कुछ पुराने खण्डर की फोटो ले रहा था कि उसे वह घूंधट वाली लड़की फिर दिखती हैं,रोहन उस देख उस के पीछे -पीछे जाता है, पर कुछ दूर जाने पर वह लड़की पता नहीं कहाँ घायब हो जाती हैं, रोहन असमझस में पड़ जाता है कि आखीर वह औरत है कौन ??रोहन उस लड़की का पीछा करते-करते गाँव में पहूँच जाता है सभी गाँव वाले उसे अजीब नज़रो से देखते हैं,रोहन एक दुकान पर जा कर पानी की बोतल लेता हैं ,वह दुकानवाला भी उसे अजीब सी नज़रो से घूरता हैं,रोहन से रहा नही गया,वह दुकान वाले से पुछता है,"क्या हुआ है सब को, मै जब से गाँव में आया हुँ तब से सभी मुझे ऐसे गुर रहे हैं जैसे के मैं कोई भूत हूँ।"

इस पर वह दुकानदार कहता हैं,"तुम उस हवेली में ठहरे होना।"

रोहन:-"हवेली, .....कौन-सी....??"

दुकानदार:- "वही जहांं तुम ठहरे हो।"

रोहन:- ......"पर वह तो गेस्ट हाउस हैं ना"

दुकानदार:- ....."किस भ्रम में हो .....वहा कोई गेस्ट हाउस नही हैं......वहा तो क्या....इस पुरे गाँव मे भी कोई गेस्ट हाउस नही हैं।"

दुकानदार की बात सुन कर रोहन सोच में पड़ जाता है.... दुकानदार कहता हैं

"आज तक कोई भी उस हवेली से जिन्दा वापस नहीं लौटा .....तुम पहले आदमी हो जो उस हवेली से जिन्दा वापस लौटे हो,इसलिए ही सभी गाँव वाले तुम्हें इस तरह देख रहे थे । वो घूंघटवाली लड़की किसी को भी जिन्दा नहीं छोड़ती है।"

रोहन:- "घूंघटवाली लड़की...., पर वो...उस ने तो मेरी मदद की थी.....इतना ही नहीं.... वो मेरा ख्याल भी रखती हैं"

दुकानदार की बात को वहम् समझ रोहन वापस गेस्ट हाउस की तरफ लौट जाता है, पर वहा पहुँने पर क्या देखता है कि उस गेस्ट हाउस की जगह एक पुरानी सी हवेली नजर आती हैं, यह देख रोहन थोड़ा डर जाता है, और मन ही मन सोचता हैं कि क्या गाँववाले जो कह रहे थे वो सच था।....इतना सोच वह सच्चाइ जानने के लिए आगे बढ़ता है, रोहन हवेली में पहुँच कर बहादुर को आवाज़ लगाता है......"बहादुर......, बहादुर,....

कहाँ हो तुम ,.....मेरा समान कहा हैं,.....,वो घूंघटवाली औरत कौन है...??"

तभी वह घूंघटवाली लड़की सीढियां से उपर की तरफ जाती हुइ नज़र आती हैं,रोहन उस के पीछे-पीछे जाता है और उसी कमरे में पहुँच जाता है जहां वह ठहरा था।अचानक वह घूंघटवाली लड़की चलते-चलते रूक जाती है, रोहन उस के करीब जाकर उसे छुने की कोशिश करता हैं पर छु नही पाता है वो फीर से हाथ पकड़ने की कोशिश करता हैं पर पकड़ नहीं पाता,तभी जोरो की हवा आती हैं... और ..,उस औरत का घुंघट उड़ जाता है रोहन उस के चेहरे को देख लेता हैं, ...और उसे देखता ही रह जाता है उसे देख ऐसा लग रहा था मानो सदियों से उसे जानता हो।

रोहन :-" कौन हो तुम....? ऐसा क्यू लगता हैं, जैसे हम एक - दूसरे को सदियों से जानते हों।"

इस पर वो लड़की बोलती है:-" किशन, तुम ने मुझे नहीं पहचाना, मै तुम्हारी नदंनी.....याद करो किशन.....वो पुराना मंदिर जहां हम मिलते थे"

रोहन:-" मुझे कुछ याद नहीं आ रहा .....क्या कह रही हो तुम ??,......आखीर हो कौन तुम ...?"

तब वह लड़की रोहन को अपने साथ आने को कहती हैं,वह उस खाली दिवार की तरफ जाती हैं,तभी वह दिवार अचानक दरवाजे की तरह खुल जाती हैं,रोहन उस लड़की के पीछे-पीछे उस दिवार के पीछे वाले रूम में पहुच जाता है, वहा एक दिवार पर नंदनी की पेंटीग लगी थी,जिसे देख कर उसका सर चक्कराता हैं ,किशन .....किशन की आवाज़े गूंजने लगती हैं, एक चलचित्र-सा आँखो के सामने छा जाता है, रोहन को अपना पीछला जन्म याद आ जाता है

उस जन्म में रोहन का नाम किशन होता है और वो घूंघटवाली लड़की कोई ओर नहीं नंदनी होती हैं। नंदनी और किशन एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। दोनो एक-दूसरे पर जान छिड़कते थे। वो दोनो अक्सर गाँव के उस पुराने मंदिर के पास मिलते थे।पर नंदनी के भाई को उन का प्यार मंजूर नहीं था क्यू कि किशन एक बंजारे का बेटा था, और नंदनी तो राजघराने की थी।

जब नंदनी के भाई को उन दोनो के प्यार के बारे में पता चलता है तो वो किशन और उस के परिवार को गाँव छोड़ कर जाने को कहता है, पर किशन उस की बात नहीं मानता है,वो गाँव छोड़ के जाने से इन्कार कर देता है, नंदनी का भाई उसे जान से मारने कि धमकी देता है, ये बात जैसे ही नंदनी को पता चलती हैं वो किशन को तुरन्त उस पुराने मंदिर के पास मिलने आने को कहती है!नंदनी लाल जोड़े में सज कर हाथो में मंगलसूत्र और सिन्दूर लिए वहा पहुँचती हैं, किशन भी वहा पहुँच जाता है,तभी नंदनी का भाई वहा कुछ गुंडो के साथ पहुँच जाता है, और किशन को चारो तरफ से घेर लेता हैं, नंदनी जैसे हि किशन की तरफ बढ़ती हैं तो उसका भाई उसे हाथ पकड़ के उसे घसीडता हुआ। गाड़ी में बिठाकर हवेली ले जाता है ।उधर वो गुण्डे़ किशन को जान से मार कर मंदिर के पास वाले तलाब में फैक कर हवेली आते हैं और नंदनी के भाई से कहते हैं कि हम ने किशन को जान से मार दिया। नंदनी ये बात सुन लेती हैं,वो अपने भाई से कहती हैं :-

"जीते- जी तो तुमने हमें मिलने नहीं दिया, पर मरने के बाद कैसे रोकोगें। मैं किशन को उसी रूप में मिलूगी जिस रूप में उसने मुझे आखरी बार देखा......दुल्हन के रूप में घूंघट निकले उसका इन्तजार करूगी।"

इतना कह कर वह अपने कमरे में जाकर चाकू से अपने हाथ की नसें काट लेती हैं तभी उस का भाई नंदनी के पास आता है,और कहता है:-

" मैं भी राजघराने से हूँ,आज मैं तुम से वादा करता हूँ मेरी जिद्द की वज़ह से मैंने अपनी लाडली बहन को खोया हैं,अब अगले जन्म में, मैं ही तुम दोनो को मिलवाउंगा।"इतना कह कर वो भी अपनी जान ले लेता है!

बहादुर ओर कोई नहीं नंदनी का भाई होता है, किशन की आत्मा तो मंदिर के तलाब के पानी के कारण मुक्त हो कर रोहन के रूप में पुन: जन्म लेती है, पर नंदनी और बहादुर की आत्मा अब तक किशन का इंतजार करती है!

इतना सब अपनी आँखो के सामने देख,रोहन को ऐसा लगता हैं जैसे कुछ ही पल में एक पूरी जिन्दगी जी गया हो। रोहन को सब याद आ जाता है,तब रोहन कहता है:-

" पर तुम तो एक आत्मा हो, ओर मैं एक जीता-जागता इंसान......हमारा मिलन कैसे हो सकता है?......इसके लिए तुम्हे इंतजार करना पड़ेगा।"

तब नंदनी कहती हैं:- "जहां इतना इंतजार किया वहा कुछ दिन ओर सही।"

तभी रोहन के पीछे से कोई वार करता हैं,वो ओर कोई नहीं ......बहादुर होता हैं,बहादुर कहता है:-

"पिछले जन्म में मैंने तुम्हेंं अलग करने के लिए मारा .....पर इस जन्म में तूम दोनो को मिलाने के लिए मारा.....अब मेरी आत्मा को मुक्ती मिल जाएगी।"

इतना कह कर बहादुर की आत्मा मुक्त हो जाती है,और रोहन और नंदनी की आत्मा का मिलन हो जाता है।



अनजान लड़की Best Horror Stories In Hindi


कुछ धुंधली सी याद है मेरे सपने की जो अब तक सबसे डरावना सपना था मेरे जीवन का। रात का सन्नाटा तेज़ हवाएं सायं सायं करके चल रही थी और मैं बेफिक्र कदमों से बढ़ी जा रही थी अनजान खतरे से बेखबर। अचानक चलते चलते मेरे कदम रुक गए क्योंकि मेरे सामने सफेद कपड़ो में एक पंद्रह सोलह साल की लड़की खड़ी थी। वो कुछ अलग सी लग रही थी रूखे रूखे से बाल, आंखे अंदर को धंसी हुई, शरीर पर मांंस खून का कोई नाम नही इतनी दुबली की जरा सी हवा चले तो उड़ जाए। पहले उसे देखकर मुझे थोड़ा डर लगा और सोचा कि इतनी सुनसान रात में इतनी छोटी लड़की यहाँ क्या कर रही है।


लेकिन मैंने थोड़ी सी हिम्मत दिखाई और उससे पूछा कि, तुम इतनी रात को यहाँ क्या कर रही हो और तुम्हारे मम्मी-पापा कहाँ है।


इतनी बात सुनकर लड़की रोने लगी और कहने लगी, मैं बहुत मुसीबत में हुँ मुझे आपकी मदद चाहिए और मेरे मम्मी पापा अब इस दुनिया मे नही है।


मुझे उसकी बात सुनकर उस पर दया आ गयी। तुम्हारा घर कहाँ है? मैने उस लड़की से पूछा। उसने पहाड़ी की ओर इशारा करके कहा मेरा घर उस पहाड़ी के पीछे गांव में है और वो छोटे बच्चे के जैसे मेरा हाथ पकड़कर चलने लगी।


कुछ दूर चलने के बाद उसका गांव आ गया। पूरा गांव शांत था जैसे यहां कुछ हुआ हो और सब मुझे हैरान होकर देख रहे थे। एक औरत मेंरे पास आकर बोली, बेटी इस गांव में तुम क्यों आयी हो यहां तो कोई भी नही आता है। शायद तुमने इस गांव के शापित होने के विषय में नही सुना।


कैसा श्राप माई और मैं यह खुद नही आई हुँ मुझे तो ये लड़की लेकर आई है। 


कौन सी लड़की बेटी ? यहाँ तो कोई नही है। जैसे ही मैने उस लड़की को देखा तो वो वहाँ नही थी और डर के कारण मेरी ची------ख निकल गयी। फिर मैने कहा कि एक दुबली सी लड़की मुझे यहां अपनी सहायता के लिए लायी है।


तब वो बूढ़ी माई मुझे एक टूटे से घर मे ले गयी जहां पर उस लड़की और उसके मम्मी-पापा की तस्वीर टंगी थी और पूछा क्या यही थी वो लड़की?


मैं स्तब्ध रह गयी ये सब देखकर और मैैंने हाँ की मुद्रा में अपना सिर हिला दिया। मेरा इतना कहना था कि वो बूढी माई जोर जोर से ईश्वर का धन्यवाद देने लगी और खुशी से नाचने लगी। किन्तु मैं चुप थी और डरी हुई भी क्योंकि मैंने अपनी आंखों से एक आत्मा को देखा था और उससे बाते भी की थी जबकि मैं आत्मा भूत आदि में विश्वास नही करती थी।


मैने हिम्मत जुटाकर उस माई से पूछा, माई तुम मेरी बात सुनकर इतनी खुश क्यों हो, जबकि तुम्हे पता है कि वो एक आत्मा थी आखिर क्यों?


माई ने कहना शुरू किया, बेटी ये आज से बीस साल पहले की बात है तब ये गांव खुशहाल हुआ करता था यहाँ पर चारो ओर खुशियां ही खुशिया थी लेकिन न जाने इस गांव को किसकी नज़र लग गयी? ये उस मनहूस अमावस की रात की बात है जब सब लोग अपने घरों में सोए हुए थे कि तभी किसी के चीखने की आवाज़ सुनाई दी। सब लोग अपने अपने घरों से बाहर आ गए और देखने लगे कि क्या बात है तभी क्या देखते है कि बिरजू की बेटी जिसकी उम्र करीब पंद्रह-सोलह वर्ष की होगी वो अपने आप ही हवा में उड़ती हुई जा रही थी किसी की समझ मे कुछ नही आ रहा था. फिर सबने हिम्मत करके उसका पीछा करना शुरू किया और वो पहाड़ी पर बनी गुफा में चली गयी हम सब भी उस गुफा के बाहर खड़े होकर देख रहे थे कि आखिर ये किस्सा क्या है... तभी हम देखते है कि एक औरत जिसके नाखून और बाल लंबे लंबे थे दांत मानो तेज़ आरी के समान आंखे बड़ी बड़ी और गुस्से में लाल ऐसे जैसे उनसे खून टपक रहा हो ये कहते कहते वो माई चुप हो गयी...


फिर क्या हुआ? मैंने उत्सुकता वश पूछा इतने में वहाँ गाव के सभी लोग आ गये।


तब माई ने कहना शुरू किया उसका इतना भयानक रूप देखकर हम सब लोग डर के मारे थर थर काँपने लगे किन्तु जो उसके बाद का मंजर था वो काफी डरावना था...


क्यों ऐसा क्या हुआ था, मैने थोड़ा सहम कर पूछा।


माई ने कहा, उस औरतने देखते ही देखते बिरजू की लड़की का सारा खून अपने दांतों से ऐसे पी लिया जैसे वो पानी पी रही हो, उसने उसके शरीर मे खून की एक भी बूंद नही छोड़ी। फिर क्या था ये हर अमावस का किस्सा था कि वो औरत पंद्रह-सोलह साल की लड़की को ही अपना शिकार बनाती थी... ये लड़की जो तुम्हे यहां लेकर आई है ये इस गांव की आखिरी लड़की थी। वो औरत कहकर गयी है कि जब तक इस गांव में लड़कियां रहेंगी तब तक ये सिलसिला यूं ही चलता रहेगा। हम गांव वालोंने बहुत से ओझाओं तांत्रिको को इस औरत को खत्म करने का उपाय पूछा किन्तु कोई भी नही बता पाया। एक रात हमारे गांव में एक साधारण से दिखने वाले एक साधु आये और हम सबके उदास चेहरे देखकर हमारे दुख का कारण पूछने लगे...


फिर क्या हुआ, मैने कौतूहल से पूछा।


माईने बताना शुरू किया कि, हम सबने उन्हें अपने दुख का कारण उस औरत के बारे में बताया। बहुत देर सोचने के बाद उन्होंने कहा कि इस गांव की जो लड़की सबसे बाद में उस औरत का शिकार बनी उसको अभी तक मुक्ति नही मिली है उसकी आत्मा ऐसे ही घूम रही है। तो उससे क्या होगा बाबा हम सबने पूछा। बाबा ने बताया कि, जिस दिन उसकी आत्मा जिस औरत को दिखाई देगी जो रोहिणी नक्षत्र में जन्मी होगी और जिसका जन्म अमावस्या को हुआ होगा वो उसे अपनी मदद के लिए इस गांव तक लेकर आएगी वही औरत उस चुड़ैल को समाप्त कर सकती है।


लेकिन मैं कैसे उसका अंत कर सकती हूँ? मैने काँपते हुए पूछा...


तब माईने हसंते हुुुए कहा, तू फिक्र  क्यों करती है हम सब है ना तेरे साथ और उस साधु बाबा ने उस औरत को मारने का उपाय भी बताया था।


क्या है वो उपाय जल्दी बताओ...


माईने बताया कि, जब तुम उस औरत के पास जाओ तो पहले वो तुम्हे मारने की कोशिश करेगी लेकिन तुम्हे घबराना नही है... बस तुम्हे उसके दाएं हाथ की तर्जनी अंगुली का नाखून तोड़ देना है और वो औरत वही धराशायी हो जाएगी।


इसमें तो बहुत खतरा है ना बाबा मुझे तो डर लगता है... मैं नही जाऊंगी... मैने डरते हुए कहा...


तभी सभी लोग मुझसे प्रार्थना करने लगे कि, हमारी बेटियों को सिर्फ आप ही बचा सकती है... आज तो ये इस गांव की ही समस्या है आने वाले समय मे ये पूरे देश मे फैल जाएगी... तब बताओ लड़कियां कहाँ से आएंगी...


उनकी बातें सुनकर मेरा मनोबल बढ़ गया और मैं उस गुफा में जाने के लिए तैयार हो गयी। मेरे साथ पूरा गांव चला... जैसे ही मैं गुफा के पास पहुंची तो दिल को दहलाने वाली एक भयंकर आवाज़ हुई और देखते ही देखते मेरे सामने एक भयावह स्त्री खड़ी हो गयी... उससे भी भयानक जो उस माईने बताई थी... मैं अंदर तक कांप रही थी, मुझे देखते ही उस औरतने मुझ पर हमला किया... किसी तरह मैं उससे बची फिर उसने मुझे अपनी मुट्ठी में उठा लिया मैने भी अवसर का लाभ उठाया और उसका तर्जनी अंगुली का नाखून तोड़ दिया नाखून टूटते ही वो औरत ज़मीन पर धराशायी हो गयी और सबने मुझे कंधे पर बैठ लिया।


उसी समय मेरी आँख खुली और मैं इस सपने के विषय मे सोचने लगी कि आखिर इसका अर्थ क्या है फिर मुझे समझ आया कि आज के परिवेश में औरत ही औरत की दुश्मन है वो उसे आगे बढ़ने नही देना चाहती और वो अपनी ही जाति पर प्रहार करती है जैसे कि वो औरत जो लड़कियों को उस गुफा में ले जाती थी।


उस गुफा  से तात्पर्य है भ्रूण हत्या से जिसमे कन्या भ्रूण को नोचकर गर्भ से बाहर निकाला जाता है और उस औरत के नाखून है वो औज़ार जिनसे इस कुकृत्य को अंजाम दिया जाता है। यदि औरत चाहे तो अपनी जाति को बचा सकती है जैसे कि सपने में मैने बचाया।



शैतान से शादी - एक छलावा Best Horror Stories In Hindi


आज रीना बहुत खुश लग रही थी। आज उसकी शादी जो होने वाली थी। रीना और संजू की मुलाकात एक गार्डन में हुई और वह मुलायम रोज की बात हो गई। दोनों के मुलाकात और बातचीत कब प्यार में बदल गया पता ही नहीं चला।


रीना के सिर्फ पापा ही थे जिसे छोड़कर वह शहर में प्राइवेट नौकरी करती थी और संजू एक बड़े मॉल का मालिक था। दोनों ने कोट में जाकर शादी करने का फैसला लिया क्योंकि संजू बहुत बिजी रहता था और अक्सर काम के सिलसिले में बाहर जाता रहता है।


रीना सुबह से फ्रेस होकर तैयार हो रही थी, तभी मोबाइल पर संजू का फोन आया।


रीना प्यार से बोली- ओय हीरो, कितना टाइम आयेगा मैं कब से तैयार बैठी हूँ।


संजू ने थोड़े गंभीर स्वर में कहा- सॉरी यार, आज शादी नहीं हो सकती। मुझे अभी एक बहुत बड़ी डील के लिए बाहर जाना पड़ेगा, तो हम शादी का प्रोगाम किसी और दिन करेंगे।


रीना रूखे स्वर में बोली- क्या, मैं आज के लिए कितने प्लान बनाए थे? कितने सपने देखे थे? लेकिन तुमने...


यह कहकर रीना मोबाइल को जमीन पर पटक दिया और सारा सामान अस्त-व्यस्त कर अपने बेडरूम में चली गई।


थोड़ी ही देर में डोरबेल बजा, रीना उस समय रो रही थी। फिर अपने आंसू पोछते हुए दरवाजा खोला। तो देखा संजू बाहर खड़ा था उसके हाथ में एक सूटकेस था।


अब क्यो आये हो, चले जाओ अपने डील के लिए- रीना रोते हुए बोली।


उसके बोलते ही संजू रीना को अपने बाहों में भर लिया जिससे रीना का गुस्सा प्यार में बदल गया। फिर संजू बोला- सौरी जानू, मैं तो तुम्हें सरप्राइज देना चाहता था।


सरप्राइज कैसा सरप्राइज- रीना उत्सुकता से बोली।


यही कि हम आज ही शादी करेंगे लेकिन अलग तरीके से- संजू बोला।


रीना- अलग तरीके से ?


संजू- हाँ लेकिन उसके बारे में मैं बाद में बताऊंगा। अभी तुम तैयार हो जाओ देखो मैं तुम्हारे लिए क्या क्या लाया हूँ।


रीना ने बैग खोलकर देखा तो उसकी आंखें चौंधिया गई। उस बैग में नौलखा हार, कंगन, हीरे लगे रेशमी साड़ी और भी बहुत कुछ।


उसे देखकर रीना चहक उठी- वाव यह तो बहुत सुन्दर है।


तब संजू प्यार से बोला- जब तुम इसे पहनोगे तब यह और भी सुंदर लगेगा।


रीना- अच्छा तुम थोड़ी देर यहाँ बैठो मैं तैयार होकर आती हूँ।


रीना अंदर जाती है और संजू वही बैठ जाता है तभी रीना का टूटा मोबाइल वाइब्रेंट होता है। जिसमें संजू का काल आ रहा था उसे देखकर वहाँ आये संजू एक कुटील मुस्कुन के साथ उस मोबाइल को पैरों से कुचल दिया।


रीना और संजू आधे घंटे बाद गाड़ी में बैठ कर कोर्ट के तरफ निकल पड़ते है।


रीना बहुत एक्साइटेड थी तभी संजू ने गाड़ी कोर्ट की तरह न लें जाकर दूसरे तरह मोड़ दिया।


रीना चौक कर बोली- अरे संजू, कोर्ट जाने का रास्ता तो उधर है ???


संजू- मुझे पता है, लेकिन मैं तुम्हें एक और सरप्राइज देना चाहता हूँ।


रीना- सरप्राइज कैसा सरप्राइज ??


संजू- थोड़ा इंतजार करो सब पता चल जाएगा।


थोड़ी ही देर में गाड़ी एक भव्य और विशाल बंगले पर जाकर रूकी।


रीना हैरानी से बोला- संजू यह कहा ले आए?


संजू- अन्दर चलो सब पता चल जाएगा।


दोनों अन्दर जाते है मुख्य द्वार पर लोग उनके स्वागत के लिए खड़े थे। तभी एक महिला आरती लिए उनके पास जाती है और कहती है- अरे वाह, क्या बहू ढूंढ कर लाया है संजू। यह तो हीरा है हीरा।


रीना को समझने में देर नहीं लगी कि वह उसका घर था और वे लोग उसके परिवार । वह संजू से बोली- तुमने मुझे अपनी फैमिली के बारे में पहले क्यो नही बताया?


संजू रीना को समझाते हुए बोला- ताकि तुम मुझे देखकर शादी करो, मेरे दौलत को देखकर नहीं।


अच्छा अब बातें बहुत हो गयी, अब अन्दर चलो मुहुर्त का समय निकला जा रहा है- संजू की मां बोली।


रीना संजू की तरह देखने लगी तो संजू ने कहा- हाँ यही सरप्राइज है हमारी शादी यही हमारे घर में होगी।


सब अंदर जाते है रीना अंदर के नजारे को देखकर आश्चर्य चकित हो जाती है पूरे बंगले को फूलों से सजाया था।


रीना यह सब देखकर बहुत खुश थी, शादी का मंत्र चल रहा था। रीना का सर साड़ी से ढका था थोड़ी देर बाद संजू ने रीना को हार पहनाया। फिर रीना ने संजू को हार पहनाने के लिए अपना सर उपर किया तो वह चीख पड़ी।


वह संजू नहीं था बल्कि उसके जगह एक खूंखार शैतान खड़ा था जो बेहद डरावना लग रहा था। उसे देख कर रीना चीखते हुए भागने लगी। तभी उसने देखा वहाँ मौजूद सभी आदमी शैतान बन ग‌ए थे और रीना को देखकर मुस्कुरा रहे थे।


दरअसल वह शैतान का बिछाया जाल था, जिसमें रीना फंस चुकी थी।


रीना गेट से बाहर निकलने वाली थी कि उसके पापा की आवाज सुनकर ठिठक गई। पीछे मुड़कर देखा तो मंडप में उसके पापा को वह शैतान पकड़ रखा है। उसे देखकर रीना दौड़ते हुए अपने पापा के पास पहुंचती है।


तब वह शैतान बोलता है- अगर अपने पापा को जिंदा देखना चाहती हो तो मुझसे शादी करना होगा।


रीना अपने एक मात्र परिवार अपने पापा के लिए शादी के लिए तैयार हो जाती है


रीना रोते हुए उस शैतान के गले में वरमाला पहनाती है और फेरों के लिए खडी हो जाती है। फिर मांग भरने के लिए वह शैतान सिंदूर ढूंढने लगा लेकिन उसे सिंदूर नहीं मिला।


वह गुस्से से चिल्लाता हुआ बोला सिंदूर कहाँ है- उसका आवाज पूरे बंगले में गूंजने लगी। तभी उसने रीना के पापा के जेब में सिंदूर का रंग देखा जो उन्होने अपने बेटी को शादी से बचाने के लिए छुपाया था।


वह शैतान हँसते हुए अपने हाथ में पकड़े तलवार से रीना के पापा का गर्दन काट देते है और उनके खून से रीना के मांग को भर देते है।


अपने पापा की हालत देख रीना जोर से चीख कर बेहोश हो गई।


होश आया तो वह अस्पताल में थी संजू उसे जगाने की कोशिश कर रहा था। रीना के होश में आते ही वह बोला- क्या हुआ डियर तुम बेहोश कैसे हो ग‌ई।


रीना संजू को देखकर उससे दूर होते हुए बोली- तुम तो शैतान हो क्या चाहिए मुझसे।


संजू हैरानी से- क्या हो गया है तुम्हे? मैं हूँ तुम्हारा संजू। मैंने जब तुम्हे फोन लगाया तब तुमने उठाया ही नहीं। मुझे तुम्हारी चिंता होने लगी इसलिए मीटिंग से जल्दी आकर तुम्हारे घर गया तो तुम बेडरूम में बेहोश पड़ी थी।


रीना- तो वो सब क्या था, क्या वह एक सपना था?


तभी रीना के पापा के पड़ोसी दौड़ते हुए रीना के पास आए और बोले- बिटीया, अब तुम्हारे पापा नहीं रहे किसी ने उनका गला काट कर मार डाला है।


रीना को झटका सा लगा वह हकलाते हुए बोली- इसका मतलब वह सपना नहीं था।


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