05 Best Moral Stories In Hindi | 2021

इस Blog में आपको Best Moral Stories In Hindi में पढ़ने को मिलेंगी जो आपने अपने दादा दादी से सुनी होंगी। ये hindi stories बहुत ही प्रेरक है। ऐसे  किस्से तो आपने अपने बचपन मे बहुत सुने होंगे पर ये किस्से कुछ अलग हौ। हमने भी इस ब्लॉग में Best Moral Stories In Hindi में लिखा है जिसको पढ़कर आपको बहुत ही ज्यादा आनंद मिलेगा और आपका मनोरंजन भी होगा। इसमे कुछ Best Moral Stories In Hindi दी गयी है। जिसमे आपको नयापन अनुभव होगा। यदि आप पुरानी कहानियाँ पढ़कर बोर हो गए है तो यहाँ पर हम आपको Best Moral Stories In Hindi दे रहे है जिसको पढ़कर आपको बहुत ही ज्यादा मज़ा आने वाला है।


05 Best Moral Stories In Hindi
05 Best Moral Stories In Hindi



हाथी क्यों हारा | short stories in hindi for kids


एक बार एक व्यक्ति, एक हाथी को रस्सी से बांध कर ले जा रहा था | एक दूसरा व्यक्ति इसे देख रहा था | उसे बढ़ा आश्चर्य हुआ की इतना बढ़ जानवर इस हलकी से रस्सी से बंधा जा रहा है दूसरे व्यक्ति ने हाथी के मालिक से पूछा ” यह कैसे संभव है की इतना बढ़ा जानवर एक हलकी सी रस्सी को नहीं तोड़ पा रहा और तुम्हरे पीछे पीछे चल रहा है| हाथी के मालिक ने बताया जब ये हाथी छोटे होते हैं तो इन्हें रस्सी से बांध दिया जाता है उस समय यह कोशिश करते है रस्सी तोड़ने की पर उसे तोड़ नहीं पाते | बार बार कोशिश करने पर भी यह उस रस्सी को नहीं तोड़ पाते तो हाथी सोच लेते है की वह इस रस्सी को नही तोड़ सकते और बढे होने पर कोशिश करना ही छोड़ देते है।


नेकी की राह | short stories in hindi for kids


शीत ऋतु अपने चरम पर थी । चारों ओर पहाड़ों और जंगलों से घिरा हुआ एक सुंदर सा गाँव था । वहाँ एक छोटी लड़की रहती थी । उसे अपने सहेली के घर जाने की इच्छा हुई । वह अपने हाथ में सिर्फ एक रोटी का टुकड़ा लेकर घर से चली , उसने सड़क के किनारे एक बूढ़े को देखा । मैं भूखा हूं ,उसने कहा मुझे कुछ खाने को दो ! लड़की ने उसे रोटी का टुकड़ा दे दिया । वृद्ध ने अपने दोनों हाथ उठाकर उसे आशीर्वाद दिया ।

थोड़ा आगे जाने पर उसे एक छोटा बच्चा मिला , बच्चे ने लड़की से प्रार्थना कि मुझे ओढ़ने के लिए कुछ दो । लड़की ने थोड़ी देर सोचने के बाद झटपट अपना साल निकालकर उसे दे दिया । थोड़ा आगे गई एक बच्चा ठंड से कांप रहा था ,लड़की को उस पर दया आ गई । उसने अपनी मफलर से बच्चे को ढक दिया । थोड़ा आगे चलने के बाद अब वह खुद सर्दी से काँपने लगी ,वह एक पेड़ के नीचे दुबक कर बैठ गई ।

अगले ही पल उसने तारों को आसमान से नीचे गिरते देखा । उसने जब गौर से देखा तो वे सोने के सिक्के थे ,उसका शरीर सुंदर कपड़े से ढक गया , उसके पैरों में जूते थे ,गले में मफलर थी । उसके सामने एक सुंदर सी टोकरी थी , जो फलों और मिठाइयों से भरी हुई थी । भगवान ने उसकी दयालुता के लिए उसे आशीर्वाद और इनाम दिया था ।


परी की दयालुता | short stories in hindi for kids


किसी नगर में एक अमीर आदमी रहता था। उसके पास बहुत पैसा था। शहर भर में उसका बहुत नाम था, किन्तु इतना सब होते हुए भी उसमें घमंड नहीं था। वह दीन-दुखियों की सहायता किया करता था। उसकी हवेली में मांगने वालों की हमेशा भीड़ लगी रहती थी, पर दूसरों को ख़ुशी देने वाला वह अमीर हमेशा उदास-उदास दिखाई पड़ता था। वह ही नहीं, उसकी पत्नी भी हमेशा चिंता में डूबी रहती थी। इसका कारण था उनके घर में संतान का न होना। दोनों पति-पत्नी यही सोचते रहते थे कि उनके बाद इस सारी धन-दौलत का क्या होगा ?

उनकी हवेली के साथ एक बहुत खूबसूरत बगीचा भी था। उस बगीचे में संगमरमर की बनी हुई कई आदमकद मूर्तियां खड़ी थीं। अमीर की पत्नी को सलीके से जिंदगी बिताने का बेहद शौक था, इसलिए उसने बगीचे में परियों की मूर्तियों के पास अपने बैठने के लिए खूबसूरत जगह बनवाई हुई थी। यहां अनेक रंग-बिरंगे फूल खिले थे। अमीर की पत्नी माली से फूलों की मालाएं बनवाती और स्वयं आकर परियों के गले में पहनाया करती थी। एक दिन अमीर की पत्नी संतान की चिंता में बहुत ही उदास थी।

उस दिन उसका जन्म दिन भी था। वह चुपचाप बगीचे में आकर बैठ गई और मन-ही-मन सोचने लगी- 'बिना संतान के भी कोई गृहस्थ जीवन है। बिना बच्चों के हवेली कैसी सूनी-सूनी दीख पड़ती है।' बहुत देर तक वह इन्हीं विचारों में खोई रही। थोड़ी देर बाद पक्षियों का चहचहाना सुनकर उसका ध्यान टूटा। दूर-दूर से आकर पक्षी रैन बसेरा करने के लिए पेड़ों पर बैठ रहे थे। तभी उसने जाना कि दिन ढल रहा है। आज उसकी हवेली में जन्म दिन समारोह का भी आयोजन किया गया था। उसने सोचा- 'जल्दी से हवेली में चलूं। पतिदेव मुझे ढूंढ रहे होंगे।'

जैसे ही वह उठी, उसे गुनगुनाहट की मीठी आवाज सुनाई दी। वह सोचने लगी- 'अरे बगीचे में कौन आ गया ? यहाँ तो किसी को भी आने की आज्ञा नहीं है। फिर यह आवाज तो किसी नारी की लगती है।' यह सोचकर वह इधर-उधर देखने लगी। तभी श्वेत वस्त्र धारण किए एक बहुत सुंदर लड़की उसके सामने आ खड़ी हुई। उसे देखकर अमीर की पत्नी को आश्चर्य हुआ कि बाग में परियों की प्रतिमाओं में से एक परी का जो मुकुट था, वैसा ही मुकुट और ताजे फूलों की माला इस लड़की ने पहन रखी थी। 'क्यों, मुझे पहचाना नहीं ? मुस्कराकर लड़की ने पूछा। सुनकर भी गृह-स्वामिनी चुप खड़ी रही। उसे कुछ सूझ ही नहीं रहा था कि वह क्या उत्तर दे। फिर वह बोली- 'कैसे पहचानूंगी ? मैं तुम्हें पहली बार देख रही हूँ। तुम इतनी सुंदर हो। इस शहर की तो लगती नहीं। कहाँ से आई हो ?

लड़की बोली- 'रहने वाली तो मैं परी लोक की हूँ, मगर तुम्हारे बाग में भी तो हम रहती हैं। तुमने जो प्रतिमाएं लगाई हैं, वे हमें बहुत अच्छी लगती हैं। अक्सर पूनम की रात में हम इस बाग में आती हैं। तुम परियों से प्यार करती हो न।' अमीर की पत्नी गौर से उस लड़की को देखती हुई बोली- 'तो तुम परी हो, तभी इतनी सुंदर हो। तुम्हारे छोटे-छोटे पंख कितने सुंदर लग रहे हैं। मुझे सचमुच परियां बहुत अच्छी लगती हैं। तुम मुझे बहुत पसंद हो। परी बोली- 'मगर परियां तो फूलों की तरह हंसती-खिलखिलाती रहती हैं। तुम परियों को प्यार तो करती हो, फिर इतनी उदास क्यों रहती हो ? हमारी तरह खिलखिलाकर हंसो।'

यह सुनकर अमीर की पत्नी का दुःख उसकी आंखों में भर आया। उसकी आंखों से आँसू टपक पड़े। फिर उसने अपने सारे दुखों को परी के सामने उड़ेलकर रख दिया। 'दुखी मत हो।' परी बोली- 'मैं तुम्हारी इच्छा पूरी करूँगी।' सुनकर अमीर की पत्नी बोली- 'क्या तुम सचमुच मुझे संतान दे सकती हो ? 'हां-हां, क्यों नहीं। ध्यान से सुनो।' परी ने कहा- 'तुम कल सुबह नहा-धोकर इसी स्थान पर आ जाना। उस सामने वाले पेड़ पर तुम्हें दो सेब लटकते हुए मिलेंगे। बिना किसी को बताए तुम उन्हें छीलकर खा लेना। फिर देखना, तुम्हारे एक नहीं, दो सुंदर पुत्र पैदा होंगे। अब जाओ, धूमधाम से अपना जन्मदिन मनाओ।' इतना कहकर परी अंतर्धान हो गई।

दूसरे दिन अमीर की पत्नी नहाकर बिना किसी को बताए सीधे बाग में पहुँची। वह जल्दी-से-जल्दी सेब देखना और खाना चाहती थी। सामने ही पेड़ पर उसे दो सेब लटकते दिखाई दे गए। सेबों को देखकर अमीर की पत्नी खुश हो गई। ख़ुशी में वह परी की बात भूल गई और एक सेब को बिना छीले ही खा गई। तभी उसे याद आया कि परी ने तो उसे सेब छीलकर खाया। धीरे-धीरे समय बीता। थोड़े दिन बाद अमीर की पत्नी ने दो जुड़वा लड़कों को जन्म दिया। उनमें से पहला लड़का तो एकदम काला और कुरूप था। उसे देखकर सब डर गए। मगर दूसरा लड़का बहुत ही खूबसूरत किसी राजकुमार जैसा था। धीरे-धीरे दोनों बच्चे बड़े होने लगे। दोनों ही बहादुर, विनम्र और होशियार थे। अमीर की पत्नी अपने दोनों बेटों से समान रूप से प्यार करती थी, लेकिन घर के नौकर-चाकर और स्वयं अमीर भी उस कुरूप लड़के से नफरत करते थे।

दोनों जवान हुए तो उनकी शादी की बात शुरू हुई। जो भी रिश्ता आता, छोटे लड़के के लिए ही आता। माँ को यह देखकर बहुत दुख होता। एक दिन उसका बड़ा बेटा बोला- 'माँ! तुम इतनी दुखी क्यों रहती हो ? मैं जानता हूँ, तुम मुझे बहुत प्यार करती हो। तुम उदास होती हो तो मैं भी दुखी हो जाता हूँ।' माँ ने कहा- 'बेटा ! भगवान ने तुम्हारे साथ अन्याय किया है, लेकिन मैं भगवान को ही क्यों दोष दूँ ? यह तो मेरी भूल का नतीजा है, मैं ही इसका प्रायश्चित करूँगी।' पूनम की रात थी। माँ बगीचे में इसी तरह उदास बैठी बेटे के बारे में सोच रही थीं। पास ही बड़ा बेटा भी बैठा था।

माँ बीस साल पहले परी से मिलने की कहानी बेटे को सुना रही थी। सुनाते-सुनाते माँ को नींद आ गई। बेटा माँ की सुनी कहानी के अनुसार एक परी की मूर्ति के पास जाकर खड़ा हो गया। वह सोचने लगा- 'माँ ने यह भी तो बताया था कि पूनम की रात को यहाँ परियाँ आती हैं। काश! आज परियाँ आ जाएँ और मेरा दुख दूर कर दें।' तभी छम-छम की आवाज सुनाई दी। उसने इधर-उधर देखा, श्वेत वस्त्र पहने एक सुंदर परी नाच रही थी। वह मंत्र-मुग्ध-सा होकर उसे देखता रह गया। परी नाच चुकी तो उस लड़के के पास आई। लड़का उसे देखता ही रहा। समझ में नहीं आ रहा था कि वह उस लड़की से क्या कहे ? तभी परी बोली- 'तुम मुझे नहीं पहचानते, किन्तु मैं तुम्हें जानती हूँ। तुम्हें ही नहीं, तुम्हारा दुख भी जानती हूँ। जाओ, तुम अपने कमरे में जाकर सो जाओ। बस एक काम करना, खिड़की खुली ही रखना। सुबह उठोगे तो तुम्हारा दुख दूर हो चुका होगा।' इतना कहकर परी चली गई।

लड़का कमरे में आकर सो गया। रात को उसे लगा, जैसे खिड़की से आती दूधिया किरणें उसके शरीर को ठंडक पहुँचा रही हैं। वह एक बार को सिहर उठा। फिर करवट बदलकर सो गया। सुबह जब वह बहुत देर तक नहीं उठा तो माँ ने आकर उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया। लड़के ने दरवाजा खोला तो माँ हैरान होकर बोली- 'तुम कौन हो और इस कमरे में क्या कर रहे हो ? 'माँ! तुमने मुझे पहचाना नहीं। मैं तुम्हारा लाड़ला, तुम्हारा बड़ा बेटा ही तो हूँ।' लड़का बोला। 'बेटे! सच, तुम मेरे बेटे हो। फिर तो यह चमत्कार हो गया। जाकर शीशे में अपना चेहरा तो देखो।' माँ ख़ुशी से बोली। दोनों माँ-बेटे दौड़कर शीशे के सामने गए।

उसने जब अपना चेहरा देखा तो हैरान रह गया। ख़ुशी से चहकता हुआ वह बोला- 'यह उस परी का कमाल है माँ!जो कल रात मुझे मिली थी।' माँ बोली- 'हाँ बेटे! उसी परी ने मेरी इच्छा पूरी भी की थी और उसी ने तुम्हारी सूरत भी बदल दी। सच ही कहा जाता है कि परियाँ बहुत दयालु होती हैं। यह कहते हुए माँ-बेटे को लेकर बगीचे में गई, मगर वहाँ परी नहीं थीं। परियों की मूर्तियाँ खड़ी मुस्करा रही थीं।


सर्कस की सैर | short stories in hindi for kids


सब बच्चों को सर्कस जाना बहुत प्रिय होता हैI वहाँ मौज मस्ती तो होती ही है साथ में मनोरंजन भी होता हैI

जब मीता और बबली अपने मम्मी पापा के साथ वहां पहुँचे तो एक जोकर ने बबली और मीता को गोदी में उठा लिया और डांस करते हुए तरह तरह के मुँह बनाने लगाI दोनों भी किलकारी मार के हँसने लगीI

थोड़ी देर में असली शो शुरू हो गयाI

कभी लड़के और कभी लड़कियाँ अपने करतब दिखाने लगेI कोई बहुत ऊँचे जाकर करतब दिखाता और फिर नीचे छलांग लगा देताI फिर कोई पशु पक्षियों के साथ खेल दिखाने लगता I बीच बीच में जोकर भी आते जाते रहे और हमें हँसाते रहेI कभी कोई जादूगर आ जाता और जादुई खेल दिखा हमे मोहित कर लेताI

मीता और बबली को इतना मजा आ रहा था कि वो दोनों वहाँ से हिलने को तैयार नहीं थीं I

दो घंटे सर्कस देख कर वे सब खुशी खुशी घर लौट आए लेकिन इस वादे के साथ कि मम्मी पापा मीता और बबली को जल्दी ही सर्कस दिखाने लाएँगे।


चील और लोमड़ी | short stories in hindi for kids


चील और लोमड़ी एक चील और लोमड़ी काफी लंबे अर्से से एक अच्छे पड़ोसी की तरह रहते चले आ रहे थे। चील का घोसला पेड़ के ऊपर स्थित था और लोमड़ी की माँद उसी पेड़ के नीचे।.

एक दिन चील को अपने बच्चों का पेट भरने के लिए कोई भोजन नसीब नहीं हुआ। उसने यहाँ-वहाँ देखा तो उसे पता लगा कि लोमड़ी अपने घर पर नहीं है।

वह झट से नीचे उतरी और लोमड़ी का एक बच्चा पंजे में दबाकर अपने घोसले में ले गयी। वह आश्वस्त थी कि उसके घोसले की ऊँचाई उसे लोमड़ी के प्रतिशोध से बचायेगी।

चील उस लोमड़ी के बच्चे को अपने भूखे बच्चों में बांटने ही वाली थी कि लोमड़ी अपनी माँद में लौटी और अपने बच्चे की सुरक्षित घर वापसी का याचना करने लगी।

चील ने उसकी अनुनय-विनय पर कोई ध्यान नहीं दिया। लोमड़ी को जब अपने तमाम प्रयास व्यर्थ जाते दिखाई दिए, त

वह पड़ोस के एक किसान के खेत पर पहुँची। वह किसान खाना पका रहा था। लोमड़ी वहाँ से जलती हुई मशाल उठा लायी और पेड़ को आग लगा दी।

अपने बच्चों और स्वयं के जीवन पर खतरा मंडराता देख चील ने लोमड़ी के बच्चे को सही सलामत वापस कर दिया। "

एक तानाशाह उन लोगों से कभी सुरक्षित नहीं होता जिन पर वह तानाशाही करता है।"

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