Best Akbar Birbal Story In Hindi

इस Blog में आपको Best Akbar Birbal Story In Hindi में पढ़ने को मिलेंगी जो आपने अपने दादा दादी से सुनी होंगी। ये hindi stories बहुत ही ज्ञानवर्धक है। अकबर और बीरबल के किस्से तो आपने अपने बचपन मे बहुत सुने होंगे। हमने भी इस ब्लॉग में Best Akbar Birbal Story In Hindi में लिखा है जिसको पढ़कर आपको बहुत ही ज्यादा ज्ञान मिलेगा और आपका मनोरंजन भी होगा। इसमे कुछ Best Akbar Birbal Story In Hindi 2021 दी गयी है। जिसमे आपको नयापन अनुभव होगा। यदि आप पुरानी कहानियाँ पढ़कर बोर हो गए है तो यहाँ पर हम आपको Best Akbar Birbal Story In Hindi दे रहे है जिसको पढ़कर आपको बहुत ही ज्यादा मज़ा आने वाला है।


Best Akbar Birbal Story In Hindi
Best Akbar Birbal Story In Hindi



बीरबल की खिचड़ी


अकबर के शहर फतेहपुर सिकरी में सर्दियों के दौरान काफी ठंड पड़ती थी। एक बार, बादशाह ने यह घोषणा करवा दी कि वह सोने के हजार सिक्के उसे देंगे जो शाही महल के बाहर स्थित ठंडी झील में पूरी रात खड़े होने की हिम्मत करेगा।

कई दिनों तक अकबर के पास कोई भी नहीं आया। फिर एक दिन एक गरीब ब्राह्मण दरबार में आया। अकबर उस गरीब आदमी को देखकर हैरान रह गए। वह बहुत कमजोर और बीमार था। अकबर ने पूछा, ”तुम काफी कमजोर और बीमार हो। तुम इस मुश्किल चुनौती को क्यों लेना चाहते हो?“

ब्राह्मण बोला, ”मेरे राजा, मैं एक गरीब आदमी हूं। मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं, जो भूखे हैं। मुझे पैसों की जरूरत है।“

अकबर राजी हो गए। ब्राह्मण को दो पहरेदार झील में लेकर गए। ब्राह्मण ने अपने सारे कपड़े उतारकर जल में प्रवेश किया और पहरेदारों की निगरानी में बर्फ जैसे ठंडे पानी में पूरी रात खड़ा रहा। अगली सुबह पहरेदार ब्राह्मण को दरबार में लेकर गए। अकबर ब्राह्मण की बहादुरी पर हैरान था। उसने पूछा, ”तुमने सारी रात ठंडे पानी में खड़े रहने के लिए प्रबंध कैसे किया? क्या तुम्हें ठंड नहीं लगी?“

ब्राह्मण ने कहा, ”जी महाराज! मुझे बहुत ठंड लग रही थी पर तभी मैंने उन दीपकों को देखा जो महल के मीनारों में चमक रहे थे। मैं सारी रात उन्हें देखता रहा और उन्होंने मुझे गर्म रखा।“

जब अकबर ने यह सुना तो वह ब्राह्मण से बोला, ”दीपकों ने सारी रात तुम्हें गर्म रखा है। यह तो धोखेबाजी है। तुमने अपना कार्य ईमानदारी से नहीं किया। तुम्हें कोई सोना नहीं मिलेगा।“ और उसने पहरेदारों को आदेश दिया किा वे ब्राह्मण को दरबार से बाहर निकाल दें।

गरीब ब्राह्मण बहुत परेशान था। वह जानता था कि बादशाह ने उसके साथ अन्याय किया है। लेकिन बादशाह के साथ तर्क कौन करता? वह दुखी होकर घर चला गया। जब वह सब हुआ, तब बीरबल दरबार में उपस्थित था। उसने सोचा, ”बादशाह बहुत मनमानी कर रहे हैं। मुझे उन्हें सबक सिखाना चाहिए, ताकि ब्राह्मण को वह सोना मिल सके जिसका वह हकदार है।“ बीरबल अकबर के पास गए और सम्मान के साथ झुककर कहा, ”जहांपनाह! मैंने अपने मित्रों के लिए एक दावत का आयोजन किया है। मैं आपको और सभी मंत्रियों को आमंत्रित करना चाहता हूं। कृपया आज शाम को दावत के लिए मेरे घर पर पधारें।“

अकबर यह सुनकर बहुत खुश हुआ। शाम को अकबर ने खबर भिजवाई कि वे आ रहे हैं। परंतु बीरबल ने कहला भेजा कि अभी खाना तैयार नहीं हुआ है। जब तैयार हो जायेगा तो खबर भेज दूंगा। जब बहुत देर तक खबर नहीं आयी तो अकबर स्वंय अपने मंत्रियों के साथ बीरबल के घर पहुंच गया पर जब उन्होंने बीरबल को घर के आंगन में देखा तो वे हैरान रह गए। बीरबल थोड़ी सी आग जलाकर उसके पास बैठा हुआ था जबकि जो बर्तन आग पर होना चाहिए था, वह एक पेड़ की एक शाखा पर ऊंचा लटक रहा था।

अकबर ने बीरबल से पूछा, ”तुम्हें क्या लगता है, कि तुम क्या कर रहे हो,“ बीरबल ने कहा, ”जिल्लेसुभानी! मैं हम सभी के लिए स्वादिष्ट खिचड़ी बना रहा हूं।“ इस बात पर बादशाह जोर से हंसने लगे। उन्होंने कहा, ”मूर्ख, तुम्हें क्या लगता है, आग गर्म खिचड़ी तक पहुंच जाएगी, तुमने बर्तन ऊंची शाखा पर रख दिया है?“

बीरबल ने कहा, ”महाराज! आग की गर्मी बर्तन तक उसी प्रकार पहुंच जाएगी, जिस प्रकार महल के मीनार के दीपकों से गर्मी उस दिन गरीब ब्राह्मण तक पहुंची थी।“ अकबर ने हंसना बन्द कर दिया। उन्हें एहसास हो गया कि बीरबल क्या कहना चाहता है। अगले दिन उन्होंनें ब्राह्मण को बुलाया और वादे के अनुसार उसे हजार सोने के सिक्के दिए। ब्राह्मण ने बादशाह का आभार व्यक्त किया और आशीर्वाद दिया। अकबर ने बीरबल को देखा तो बीरबल मुस्करा दिए।


अशुभ चेहरा

बहुत समय पहले, बादशाह अकबर के राज्य में यूसुफ नामक एक युवक रहता था। उसका कोई दोस्त नहीं था, क्योंकि सभी उससे नफरत करते थे। सभी उसका मजाक उड़ाते थे और जब वह सड़क पर चलता तो सब उस पर पत्थर फेंकते थे। यूसुफ का जीवन दयनीय था, सभी सोचते थे कि वह बहुत ही बदनसीब है। लोग तो यहां तक कहते थे कि यूसुफ के चेहरे पर एक नजर डालने से, देखने वाले व्यक्ति पर भी बदनसीबी आ सकती है। 

इस प्रकार, भले ही लोग यूसुफ से नफरत करते थे, पर उसकी कहानी दूर-दराज तक प्रसिद्ध थी। वह अफवाहें अकबर के कानों तक भी पहुंची। वह जांचना चाहता था कि क्या लोगों का कहना सच है। उन्होंने यूसुफ को दरबार में बुलाया और उससे विनम्रता से बात की। लेकिन उसी वक्त एक दूत ने दरबार में आकर अकबर को सूचित किया कि बेगम गंभीर रूप से बीमार हैं। उस दूत ने कहा, ”जहांपनाह! आपसे अनुरोध है कि आप तुरंत रानी साहिबा के कक्ष में चलें। रानी साहिबा बेहोश हो गई हैं और चिकित्सकों को इसका कारण समझ नहीं आ रहा है।“ 

अकबर बेगम के पास भागे। वे पूरी दोपहर उनके बिस्तर के बगल में बैठे रहे। शाम को जब रानी साहिबा फिर से बेहतर महसूस करने लगी, तब अकबर दरबार में लौट आये। यूसुफ अभी भी उनका इंतजार कर रहा था। 

यूसुफ को देखते ही अकबर को गुस्सा आ गया। वे गरजे, ”तो सारी अफवाहें सच हैं। तुम वास्तव में मनहूस हो। तुमने बेगम को बीमार बना दिया है।“ उसने जेल के पहरेदारों को यूसुफ को ले जाने का आदेश दे दिया। 

बेचारे यूसुफ के पास और कोई चारा नहीं था। वह जोर से चिल्लाया और पहरेदारों से छोड़ने की विनती की। बादशाह का निर्णय बहुत अनुचित था। लेकिन दरबार में कोई भी सम्राट के विरोध में कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं कर पाया। 

अचानक बीरबल ( वहां गया, जहां यूसुफ खड़ा था, और उसके कान में कुछ फुसफुसाया। यूसुफ बादशाह के सामने झुककर बोला, ”जहांपनाह! मैं कैदखाने में जाने को तैयार हूं, पर आप मेरे एक सवाल का जवाब दीजिए, ”यदि मेरे चेहरे को देखकर रानी बीमार हो गई हैं, तो मेरा चेहरा आपने भी देखा है, तो आप बीमार क्यों नही हुए।“ अकबर को अपनी गलती का एहसास हो गया। उसने यूसुफ को जाने दिया और खजाने में से सोने का एक थैला उसे भेंट किया। एक बार फिर दरबार में बैठे लोगों ने बीरबल ( के ज्ञान और बुद्धि की प्रशंसा की। 

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